सातांकुलम कस्टोडियल डेथ: मदुरै कोर्ट ने 9 पुलिसकर्मियों को सुनाई मौत की सजा
साल 2020 में पुलिस हिरासत में हुई जयराज और बेनिक्स की मौत को अदालत ने दुर्लभतम मामला माना, दोषियों पर 1.40 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया।

पुलिस हिरासत में क्रूर यातना और हत्या का पूरा मामला
पुलिस ने 58 वर्षीय पी. जेयराज और उनके 31 वर्षीय बेटे जे. बेनिक्स को 19 जून 2020 को हिरासत में लिया था। उन पर कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान नियम तोड़ने का आरोप लगाया गया था। कुछ दिनों बाद कोविलपत्ती सरकारी अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी। जांच में यह भयावह सच सामने आया कि पुलिस हिरासत में उन्हें क्रूर यातना दी गई थी। साक्ष्यों से स्पष्ट हुआ कि पिता और पुत्र को पुलिस हिरासत में बुरी तरह पीटा गया, जिसमें निरीक्षक एस श्रीधर ने हमले के लिए उकसाया था, जबकि अन्य कर्मी हिंसा और उसके बाद सबूतों को छिपाने के कृत्य में शामिल थे।
सीबीआई की जांच और ठोस साक्ष्यों की भूमिका
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने फॉरेंसिक साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान के आधार पर यह साबित किया कि सातांकुलम थाने में उन पर क्रूर हमला हुआ था। थाने में पाए गए खून के धब्बे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटें इस अपराध के मुख्य साक्ष्य रहे। हालांकि, मुकदमे के दौरान एक आरोपी विशेष उप-निरीक्षक पॉल्दुराई की कोरोना से मौत हो गई थी। हिरासत में हिंसा का यह स्पष्ट उदाहरण पूरे देश में पुलिस की जवाबदेही पर बहस का केंद्र बन गया था।
अदालत की टिप्पणी: रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं
फैसला सुनाते हुए जज मुथुकुमारन ने गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "यदि आम नागरिक ने यह अपराध किया होता, तो सामान्य सजा दी जा सकती थी। लेकिन अपराध पुलिस ने किया है।" अदालत ने स्पष्ट किया कि जून 2020 में जेयराज और उनके बेटे बेनिक्स की हिरासत में हत्या और यातना का यह मामला समाज के लिए एक बड़ा सबक है।
भारी मुआवजा और ऐतिहासिक न्यायिक फैसला
पीड़ितों के वकील जबा सिंह ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा, "अदालत ने ए1 से ए9 तक सभी आरोपियों को मौत की सजा दी है। पहले आरोपी (ए1) को 24 लाख रुपये और दूसरे आरोपी (ए2) को 16.30 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश मिला है।" कुल मिलाकर मृतक बेनिक्स की मां को 1.40 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाएगा, और यदि आरोपी मुआवजा नहीं देते हैं, तो उनकी संपत्ति जब्त कर बेच दी जाएगी। पीड़ित परिवार की सदस्य पर्सी ने भावुक होते हुए कहा, "अदालत ने हमारे मामले में न्याय किया। हमने अदालत पर विश्वास रखा। अब कोई और परिवार ऐसा दुख न सहे, इसके लिए हम लंबे समय तक संघर्ष करते रहे।"

Pratahkal Bureau
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