West Bengal Assembly Election Results 2026 : पश्चिम बंगाल के राजनीतिक समर में तृणमूल कांग्रेस के अभेद्य दुर्ग के ढहने के बाद अब विपक्षी खेमे के भीतर ही दोषारोपण का दौर शुरू हो गया है। 4 मई को घोषित हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों ने न केवल बंगाल की सत्ता का समीकरण बदल दिया, बल्कि 'इंडिया' गठबंधन के भीतर की दरारों को भी उजागर कर दिया है। इस चुनावी महासंग्राम में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक 'लैंडस्लाइड' जीत दर्ज करते हुए 294 में से 206 सीटों पर कब्जा जमाया है, जबकि 2021 में 213 सीटें जीतने वाली ममता बनर्जी की टीएमसी सिमटकर महज 81 सीटों पर रह गई है।

इस करारी शिकस्त के बीच शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को निशाने पर लिया है। राउत ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने चुनाव से पहले राहुल गांधी द्वारा दी गई महत्वपूर्ण सलाह को दरकिनार कर दिया था। उनके अनुसार, राहुल गांधी ने ममता को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने और ध्रुवीकरण की राजनीति से बचने की चेतावनी दी थी, जिसे अनसुना करना टीएमसी के लिए आत्मघाती साबित हुआ। राउत ने राहुल गांधी को एक 'दूरदर्शी' नेता के रूप में पेश करते हुए कहा कि उनकी भविष्यवाणियां सच साबित हुई हैं और बंगाल का परिणाम उनकी राजनीतिक सूझबूझ का प्रमाण है।

हालांकि, संजय राउत के इन दावों के पीछे के कानूनी और प्रशासनिक तर्कों ने एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि इन चुनावों को 'चुराया' गया है। राउत का दावा है कि आयोग की कार्रवाइयों और बड़ी संख्या में मतदाताओं को उनके वोटिंग अधिकार से वंचित रखने के कारण जनादेश प्रभावित हुआ। दिलचस्प बात यह है कि इस तरह के आरोप केवल बंगाल तक सीमित नहीं रहे; तमिलनाडु में भी कांग्रेस के सहयोगियों ने इसी तरह की संघर्षपूर्ण स्थिति और प्रशासनिक चुनौतियों की ओर इशारा किया है।

राउत के इन बयानों के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें भारी उपहास का सामना भी करना पड़ रहा है। आलोचकों का तर्क है कि जिस राहुल गांधी की सलाह का राउत गुणगान कर रहे हैं, उनकी अपनी पार्टी कांग्रेस ने बंगाल में लगभग 300 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद केवल दो सीटों पर ही जीत हासिल की है। यह चुनावी परिणाम न केवल बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है, बल्कि यह विपक्षी एकता और भविष्य के गठबंधन की रणनीतियों पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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