क्यों कभी शादी नहीं कर पाए रस्किन बॉन्ड? 92वें जन्मदिन पर जानिए उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सच
19 मई 2026 को प्रसिद्ध भारतीय लेखक और पद्म भूषण सम्मानित रस्किन बॉन्ड अपना 92वां जन्मदिन मना रहे हैं। कसौली से मसूरी तक का उनका भावनात्मक सफर, बचपन के संघर्ष, माता-पिता के अलगाव, अविवाहित जीवन, साहित्यिक उपलब्धियां और 500 से अधिक रचनाओं की विरासत इस विशेष लेख में विस्तार से प्रस्तुत की गई है।

पद्म भूषण से सम्मानित लेखक रस्किन बॉन्ड
19 मई 2026 को भारतीय साहित्य जगत के सबसे प्रिय और संवेदनशील लेखकों में गिने जाने वाले रस्किन बॉन्ड अपना 92वां जन्मदिन मना रहे हैं। पहाड़ों की शांत वादियों, बचपन की स्मृतियों, अकेलेपन, रिश्तों की गर्माहट और मानवीय भावनाओं को शब्दों में ढालने वाले इस लेखक ने बीते सात दशकों में भारतीय साहित्य को एक ऐसी विरासत दी है, जो पीढ़ियों तक पाठकों के दिलों में जीवित रहेगी।
19 मई 1934 को ब्रिटिश भारत के कसौली में जन्मे रस्किन बॉन्ड का जीवन जितना सरल दिखाई देता है, उतना ही भावनात्मक उतार-चढ़ावों से भरा रहा। उनके पिता ऑब्रे अलेक्जेंडर बॉन्ड ब्रिटिश मूल के थे और जामनगर राजमहल में अंग्रेज़ी पढ़ाते थे, जबकि उनकी मां एडिथ क्लार्क एंग्लो-इंडियन परिवार से थीं। बचपन के शुरुआती वर्ष उन्होंने अपनी बहन एलेन के साथ जामनगर में बिताए, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनके पिता रॉयल एयर फोर्स में शामिल हो गए और परिवार देहरादून तथा मसूरी की ओर आ गया।
रस्किन बॉन्ड का बचपन बहुत कम उम्र में ही टूटते रिश्तों और व्यक्तिगत त्रासदियों से गुजरने लगा। जब वे मात्र आठ वर्ष के थे, तब उनके माता-पिता अलग हो गए। उनकी मां ने बाद में एक पंजाबी हिंदू व्यक्ति, हरि से विवाह कर लिया। इसके बाद बॉन्ड अपने पिता के साथ नई दिल्ली में रहे। उन्होंने अपने जीवन के उन वर्षों को सबसे खुशहाल समय बताया है, लेकिन यह सुख भी अधिक समय तक नहीं टिक पाया। केवल दस वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया, जिनकी मृत्यु कोलकाता में मलेरिया के कारण हुई थी। उस समय बॉन्ड शिमला के बोर्डिंग स्कूल में पढ़ रहे थे और इस घटना ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया।
पद्म भूषण से सम्मानित लेखक रस्किन बॉन्ड
शिमला के बिशप कॉटन स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही उनकी लेखन प्रतिभा उभरने लगी। उन्होंने कई साहित्यिक प्रतियोगिताएं जीतीं और महज 16 वर्ष की उम्र में अपनी शुरुआती कहानी “Untouchable” लिखी। वर्ष 1951 में स्कूल से निकलने के बाद वे बेहतर अवसरों की तलाश में चैनल आइलैंड्स और फिर लंदन पहुंचे। वहीं किशोरावस्था में उन्होंने अपना पहला उपन्यास “The Room on the Roof” लिखा, जो एक एंग्लो-इंडियन लड़के की आत्मकथात्मक कहानी थी। यह उपन्यास 1957 में प्रतिष्ठित जॉन ल्यूएलिन रीस पुरस्कार से सम्मानित हुआ और युवा लेखक के रूप में उनकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो गई।
भारत लौटने के बाद उन्होंने दिल्ली और देहरादून में फ्रीलांस लेखक के तौर पर संघर्षपूर्ण जीवन जिया। अखबारों और पत्रिकाओं में कहानियां तथा कविताएं लिखकर वे अपना खर्च चलाते रहे। आर्थिक अस्थिरता के बावजूद उन्होंने लेखन को कभी नहीं छोड़ा। वर्ष 1963 में वे मसूरी के लैंडौर इलाके में बस गए, जहां की पहाड़ियां, बारिश, जंगल और शांत वातावरण बाद में उनकी कहानियों की आत्मा बन गए।
पिछले कई दशकों में रस्किन बॉन्ड ने 500 से अधिक लघुकथाएं, निबंध और उपन्यास लिखे हैं। “The Blue Umbrella”, “A Flight of Pigeons”, “Funny Side Up”, “Ghost Stories from the Raj”, “A Season of Ghosts” और “A Face in the Dark and Other Hauntings” जैसी रचनाएं आज भी पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। बच्चों के लिए लिखी गई उनकी 50 से अधिक पुस्तकों ने उन्हें नई पीढ़ियों का भी प्रिय लेखक बना दिया। उनकी आत्मकथात्मक कृतियां “Scenes from a Writer’s Life” और “Lone Fox Dancing” उनके निजी जीवन और संघर्षों की झलक पेश करती हैं।
भारतीय साहित्य में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें कई बड़े सम्मानों से नवाजा गया। वर्ष 1992 में “Our Trees Still Grow in Dehra” के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। इसके बाद भारत सरकार ने उन्हें 1999 में पद्मश्री और 2014 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।
रस्किन बॉन्ड का निजी जीवन हमेशा पाठकों के लिए उत्सुकता का विषय रहा। उन्होंने कभी विवाह नहीं किया। इसके पीछे आर्थिक संघर्ष, बचपन में माता-पिता के अलगाव से मिला भावनात्मक आघात और स्वतंत्र जीवनशैली को प्रमुख कारण माना जाता है। उन्होंने कई अवसरों पर स्वीकार किया कि युवावस्था में वे परिवार की जिम्मेदारियां उठाने के लिए खुद को तैयार नहीं मानते थे। धीरे-धीरे वे अकेलेपन और लेखन की दुनिया में इतने रम गए कि पारंपरिक वैवाहिक जीवन की कल्पना उनसे दूर होती चली गई।
हालांकि उन्होंने कभी शादी नहीं की, लेकिन उन्होंने अपने जीवन को कभी अधूरा नहीं माना। मसूरी के लैंडौर स्थित आइवी कॉटेज में अपने दत्तक परिवार, बच्चों और नाती-पोतों के साथ वे लंबे समय से रह रहे हैं। उन्होंने स्वयं को “बिना शादी किए परिवार वाला व्यक्ति” कहा है।
92 वर्ष की उम्र में भी Ruskin Bond भारतीय साहित्य के सबसे जीवंत और सम्मानित नामों में शामिल हैं। उनकी कहानियां केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि पाठकों को बचपन, प्रकृति, अकेलेपन और मानवीय संवेदनाओं से जोड़ती हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि कठिन परिस्थितियों, व्यक्तिगत दुखों और आर्थिक संघर्षों के बावजूद रचनात्मकता और संवेदनशीलता इंसान को अमर बना सकती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
