सालाना ₹6 लाख तक का किराया अब 'टैक्स फ्री' के बराबर! अब नहीं कटेगा TDS; जानिए बजट 2026 नया गणित
बजट 2026 में मध्यम वर्ग को मिली बड़ी राहत! किराए पर TDS की सीमा ₹2.40 लाख से बढ़ाकर ₹6 लाख हुई। अब ₹50,000 महीने तक के किराए पर नहीं कटेगा कोई टैक्स। जानिए कैसे इस ऐतिहासिक फैसले से मकान मालिकों के पास बचेगा ज्यादा कैश और किराएदारों को मिलेगी कागजी कार्रवाई से आजादी। पढ़िए पूरी खबर।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने आम आदमी के वित्तीय बोझ को कम करने और मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देने की दिशा में एक युगांतरकारी कदम उठाया है। केंद्रीय बजट 2026 में वित्तीय नीतियों के सरलीकरण पर जोर देते हुए किराए पर लगने वाले टीडीएस (Tax Deducted at Source) की सीमा को 2.40 लाख रुपये से सीधे बढ़ाकर 6 लाख रुपये वार्षिक कर दिया गया है। सरकार का यह निर्णय न केवल कर प्रणाली की जटिलताओं को कम करेगा, बल्कि देश के लाखों मकान मालिकों और किराएदारों के लिए 'ईज ऑफ लिविंग' के एक नए युग की शुरुआत भी माना जा रहा है। अब तक चली आ रही पुरानी व्यवस्था के तहत, यदि कोई व्यक्ति या ऑडिट के दायरे में आने वाली संस्था साल भर में 2.40 लाख रुपये से अधिक किराया चुकाती थी, तो उन्हें 10 प्रतिशत की दर से टीडीएस काटकर सरकार के पास जमा करना अनिवार्य था। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी का मासिक किराया 25,000 रुपये होता था, तो किराएदार को टैक्स की कटौती के बाद ही मकान मालिक को भुगतान करना पड़ता था, जिससे मकान मालिक के तात्कालिक कैश फ्लो पर सीधा असर पड़ता था।
प्रशासनिक सुधारों की इस नई लहर ने अब इस दहलीज को बदलकर सालाना 6 लाख रुपये कर दिया है। इस बदलाव का धरातल पर सीधा अर्थ यह है कि अब 50,000 रुपये प्रति माह तक का किराया पूरी तरह से टीडीएस मुक्त हो गया है। इस विधायी बदलाव के व्यापक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। मध्यम वर्गीय मकान मालिक, जो अक्सर अपनी सेवानिवृत्ति या आजीविका के लिए किराए की आय पर निर्भर रहते हैं, अब बिना किसी कटौती के पूरी राशि सीधे प्राप्त कर सकेंगे। इससे उन्हें आयकर रिफंड के लिए साल भर लंबा इंतजार करने और जटिल कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी। दूसरी ओर, किराएदारों के लिए भी यह एक बड़ी प्रशासनिक राहत है, क्योंकि उन्हें अब टीडीएस काटने और उसे सरकारी कोष में जमा करने के अनुपालन (Compliance) के बोझ से छुटकारा मिल गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से बाजार में 'डिस्पोजेबल इनकम' यानी खर्च करने योग्य आय में वृद्धि होगी। जब परिवारों के हाथ में अधिक पैसा बचेगा, तो इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव उनके दैनिक उपभोग और घर के बजट पर पड़ेगा। विशेष रूप से महानगरों में रहने वाले मध्यम वर्ग के लिए, जहां किराया आय का एक बड़ा हिस्सा होता है, यह राहत किसी वरदान से कम नहीं है। सरकार का यह नीतिगत निर्णय स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि उसका उद्देश्य कर आधार को चौड़ा करने के साथ-साथ आम नागरिक को अनावश्यक कर जाल से बाहर निकालना है। यह कदम न केवल रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाएगा, बल्कि छोटे निवेशकों के विश्वास को भी मजबूत करेगा, जिससे अंततः अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
