1968 में स्थापित रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) भारत की बाहरी सुरक्षा का मुख्य स्तंभ है, जो सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय को अपनी रिपोर्ट सौंपती है।

भारत की बाहरी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए काम करने वाली 'रिसर्च एंड एनालिसिस विंग' यानी 'रॉ' (R&AW) देश की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली खुफिया एजेंसी है। वर्तमान में इसके महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह भारत की सीमाओं के बाहर से आने वाले खतरों का विश्लेषण करने और देश की विदेश नीति को सशक्त बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाती है। 1 जुलाई 2025 से पराग जैन इस संस्था के सचिव (अनुसंधान) के रूप में कमान संभाल रहे हैं। प्रशासनिक रूप से यह एजेंसी कैबिनेट सचिवालय का एक हिस्सा है, लेकिन इसे नौकरशाही के पारंपरिक नियंत्रण से मुक्त रखते हुए स्वायत्तता प्रदान की गई है। इसका मुख्य कार्य भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को प्रभावित करने वाले विदेशी घटनाक्रमों की निगरानी करना, आतंकवाद का मुकाबला करना और घातक हथियारों के प्रसार को रोकना है। प्रधानमंत्री कार्यालय को सीधे रिपोर्ट करने वाली यह विंग राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ मिलकर खुफिया जानकारी साझा करती है।

ऐतिहासिक रूप से 'रॉ' का जन्म एक विशेष आवश्यकता के कारण हुआ था। वर्ष 1968 से पहले विदेशी खुफिया जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की थी, लेकिन 1962 के चीन-भारत युद्ध और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद सरकार ने यह महसूस किया कि बाहरी खुफिया तंत्र को मजबूत करने के लिए एक अलग और समर्पित एजेंसी की जरूरत है। इसी पृष्ठभूमि में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान आर.एन. काओ ने इस एजेंसी का खाका तैयार किया और वे इसके पहले प्रमुख बने। शुरुआत में केवल 250 कर्मचारियों और 2 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू हुई यह संस्था आज हजारों विशेषज्ञों और एक विशाल बजट के साथ काम करती है। 1971 के भारत-पाक युद्ध में इसकी भूमिका, 1975 में सिक्किम का भारत में विलय और 1980 के दशक में पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम की टोह लेने जैसे अभियानों ने इसे वैश्विक स्तर पर एक सक्षम खुफिया एजेंसी के रूप में स्थापित कर दिया।

इस कार्यालय की कार्यप्रणाली बेहद जटिल और बहुआयामी है। इसके पास 'एविएशन रिसर्च सेंटर' (ARC) जैसी इकाइयां हैं जो हवाई टोही और निगरानी में माहिर हैं, वहीं 'स्पेशल फ्रंटियर फोर्स' (SFF) जैसी विशेष इकाइयां हैं जो संवेदनशील परिस्थितियों में गुप्त ऑपरेशनों को अंजाम देती हैं। 'रॉ' का अपना एक विशिष्ट सेवा कैडर है जिसे 'रिसर्च एंड एनालिसिस सर्विस' (RAS) कहा जाता है, हालांकि इसका शीर्ष नेतृत्व अक्सर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अनुभवी अधिकारियों द्वारा संभाला जाता है। यह एजेंसी न केवल पारंपरिक जासूसी करती है बल्कि तकनीकी खुफिया जानकारी (TECHINT) और संचार निगरानी (COMINT) के लिए भी विशेष इलेक्ट्रॉनिक्स और रेडियो अनुसंधान केंद्रों का संचालन करती है। इसके अधिकारी दुनिया भर में भारतीय राजनयिक मिशनों में आधिकारिक कवर के तहत तैनात रहते हैं, ताकि वैश्विक स्तर पर सैन्य और राजनीतिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा सके।

भर्ती और प्रशिक्षण के मामले में यह संस्था अत्यंत कठोर मानकों का पालन करती है। 'रॉ' में कोई सीधी भर्ती नहीं होती; इसके बजाय UPSC या अन्य प्रतिष्ठित परीक्षाओं के माध्यम से चयनित अधिकारियों को उनके प्रदर्शन और व्यक्तिगत मूल्यांकन के आधार पर इस विंग में शामिल किया जाता है। चयनित अधिकारियों को चार साल के कड़े प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है, जिसमें जासूसी की बारीकियां, विदेशी भाषाएं, आत्मरक्षा और आधुनिक तकनीकी उपकरणों का उपयोग सिखाया जाता है। उन्हें मनोवैज्ञानिक रूप से इस तरह तैयार किया जाता है कि वे कठिन परिस्थितियों में भी अपनी पहचान गुप्त रखकर देश के लिए सूचनाएं एकत्र कर सकें। प्रशिक्षण के दौरान इन्हें दुनिया के विभिन्न हिस्सों की भू-राजनीतिक स्थितियों और आर्थिक अपराधों जैसे मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में भी माहिर बनाया जाता है।

संसदीय जवाबदेही से बाहर होना 'रॉ' की एक विशिष्ट विशेषता है। यह किसी वैधानिक चार्टर के बजाय कार्यकारी आदेश के माध्यम से संचालित होती है, जो इसे लोकतांत्रिक देशों की अन्य समकालीन एजेंसियों से थोड़ा अलग बनाता है। हालांकि, समय-समय पर इसकी जवाबदेही और निरीक्षण को लेकर चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन इसकी गोपनीय प्रकृति और राष्ट्रीय सुरक्षा की संवेदनशीलता के कारण इसे एक स्वतंत्र इकाई के रूप में बनाए रखा गया है। भारत के सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) से भी इसे कुछ विशेष छूट प्राप्त हैं, ताकि संवेदनशील ऑपरेशनों की जानकारी सार्वजनिक न हो। आज 'रॉ' न केवल पड़ोसी देशों बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत के हितों के विरुद्ध काम करने वाले आतंकवादी समूहों और विदेशी ताकतों के लिए एक अदृश्य दीवार के रूप में खड़ी है, जो इसे भारत के सुरक्षा तंत्र का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बनाती है।

Pratahkal HQ

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