Gujarat ran utsav 2025 : गुजरात के कच्छ क्षेत्र में स्थित दुनिया के सबसे बड़े सफेद रेगिस्तान ने एक बार फिर रोशनी, रंग और संस्कृति का शानदार स्वागत किया है। लंबे इंतज़ार के बाद रण उत्सव की शुरुआत होते ही कच्छ का धोर्डो गांव वैश्विक यात्रियों का केंद्र बन गया, जहां हर कदम पर परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने उत्सव का शुभारंभ करते हुए इसकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि धोर्डो में आयोजित होने वाला यह उत्सव अब केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि गुजरात की अनोखी विरासत, कारीगरी और पर्यटन क्षमता का विश्वस्तरीय परिचय बन चुका है। सफेद रेगिस्तान का विराट विस्तार इस उत्सव को एक ऐसा मंच देता है, जहां कच्छ की आत्मा अपने सबसे प्रामाणिक स्वरूप में झलकती है।

इस वर्ष का रण उत्सव कच्छ की सांस्कृतिक संपदा को और भव्य रूप में प्रस्तुत करता है। पारंपरिक मिट्टी के भुंगे घर, कच्छी हैंडीक्राफ्ट्स की जटिल कढ़ाई, स्थानीय व्यंजनों की पुरानी कहानियों को संजोए स्वाद, और थार के बीच रोमांच जगाने वाली एडवेंचर गतिविधियाँ—ये सब मिलकर उत्सव को एक बहु-आयामी अनुभव बनाते हैं। जैसे-जैसे रात उतरती है, लाइट-एंड-साउंड शो रेगिस्तान को एक जीवंत कैनवास में बदल देते हैं, जबकि बच्चों के लिए बनाई गई विशेष गतिविधियाँ इस उत्सव को परिवारों के लिए भी यादगार बनाती हैं।

रण उत्सव केवल धोर्डो तक सीमित नहीं है। यहां आने वाले पर्यटकों को कच्छ की कई धरोहर स्थलों का अन्वेषण करने का अवसर मिलता है। धोलावीरा की प्राचीन हड़प्पा सभ्यता, 'रोड टू हेवन' का अलौकिक रास्ता, लखपत का ऐतिहासिक किला, माता नो मध का आध्यात्मिक धाम, नारायण सरोवर की पवित्रता, कालो डूंगर से दिखने वाला रेगिस्तान का अनोखा दृश्य, स्मृतिवन का भूकंप स्मारक और मांडवी का शांत समुद्र तट—ये सभी स्थान कच्छ की अनूठी कहानी को और गहराई देते हैं।

20 फरवरी तक चलने वाला यह उत्सव केवल कला और संस्कृति का प्रदर्शन नहीं करता, बल्कि कच्छ की आर्थिक और सामाजिक रफ्तार को भी नई दिशा देता है। स्थानीय कारीगरों, संगीतकारों और पारंपरिक समुदायों को इस मंच से जो पहचान मिलती है, वह इस क्षेत्र के आर्थिक ढांचे को मजबूती प्रदान करती है। 2000 के दशक में एक छोटे सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में शुरू हुआ यह आयोजन आज भारत के सबसे प्रतिष्ठित पर्यटन उत्सवों में गिना जाता है और हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है।

रण उत्सव ने कच्छ के उस हिस्से को—जो कभी अलग-थलग पड़ा नमक का रेगिस्तान माना जाता था—एक वैश्विक सांस्कृतिक डेस्टिनेशन में बदल दिया है। यह उत्सव केवल कच्छ को देखने का अवसर नहीं देता, बल्कि उसके रंग, धड़कन और आत्मा को महसूस करने का अनुभव कराता है। यही अनुभव इसे केवल एक फेस्टिवल नहीं, बल्कि कच्छ की जीवंत पहचान बनाता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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