राजधानी से एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया है, जहां Delhi High Court ने वरिष्ठ पत्रकार राना अय्यूब के पुराने सोशल मीडिया पोस्ट्स को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अदालत ने इन ट्वीट्स को “अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक” बताते हुए कहा कि इस प्रकार की सामग्री सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है।

राना अय्यूब, जो एक प्रख्यात पत्रकार और द वॉशिंगटन पोस्ट की कॉलमिस्ट हैं तथा “Gujarat Files: Anatomy of a Cover Up” जैसी चर्चित पुस्तक की लेखिका भी हैं, उनके वर्ष 2013 से 2017 के बीच किए गए कुछ ट्वीट्स इस विवाद का केंद्र बने हुए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन पोस्ट्स में हिंदू देवी-देवताओं और विनायक दामोदर सावरकर के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं, जो धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकती हैं और सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा दे सकती हैं।

राना अय्यूब के पुराने ट्वीट्स

इस पूरे मामले की शुरुआत अधिवक्ता अमिता सचदेवा द्वारा दायर शिकायत से हुई। नवंबर 2024 में उन्होंने साइबर क्राइम पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने राना अय्यूब के पुराने ट्वीट्स को आधार बनाते हुए भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की। जब पुलिस की ओर से तत्काल कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने अदालत का रुख किया और साकेत कोर्ट में धारा 156(3) CrPC के तहत जांच के निर्देश की मांग की।

साकेत स्थित मजिस्ट्रेट अदालत ने प्रारंभिक जांच में आरोपों को प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध मानते हुए दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 153A (समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना), 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) और 505 (सार्वजनिक शांति भंग करने वाले बयान) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। यही वह निर्णायक मोड़ था, जब एक शिकायत ने औपचारिक आपराधिक मामले का रूप ले लिया।

अपनी पुस्तक "गुजरात फाइल्स" के साथ खड़ीं पत्रकार राना अय्यूब

इस एफआईआर और मजिस्ट्रेट के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई, जिसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा। इस दौरान न्यायमूर्ति Subramonium Prasad ने सुनवाई करते हुए ट्वीट्स की प्रकृति और उनके प्रभाव का गहन परीक्षण किया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूर्ण नहीं है और यदि कोई सामग्री धार्मिक मान्यताओं को लक्षित करती है, तो उसका व्यापक सामाजिक प्रभाव हो सकता है।

अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) को नोटिस जारी करते हुए उचित कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही, सभी पक्षों से जवाब मांगा गया है और मामले की सुनवाई अभी जारी है। यह मामला केवल एक व्यक्ति या कुछ पुराने ट्वीट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसकी सीमाओं पर एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस को भी सामने लाता है। आने वाले समय में इस पर अदालत का अंतिम निर्णय न केवल इस मामले की दिशा तय करेगा, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अभिव्यक्ति की मर्यादाओं को भी प्रभावित कर सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story