रमराज कॉटन ने 3,000 धोतियों से बनाया एशिया का सबसे बड़ा पूक्कलम, रचा नया रिकॉर्ड
कोच्चि में रमराज कॉटन ने 3,000 धोतियों से 30 फीट व्यास का मुंडुकलम बनाकर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह बनाई।

तस्वीर में बाएं से दाएं एशिया बुक के निर्णायक श्री संजय भोला, रमराज कॉटन के अध्यक्ष के.आर. नागराजन और प्रबंध निदेशक बी.आर. अरुण ईश्वर पुरस्कार के साथ नजर आ रहे हैं।
, अगस्त 2026: इस ओणम पर रमराज कॉटन ने उत्सव को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाते हुए एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह बनाई है। ब्रांड ने ‘धोतियों से बनाए गए सबसे बड़े पूक्कलम प्रदर्शन’ का रिकॉर्ड अपने नाम किया। कोच्चि के फोरम मॉल में करीब 3,000 धोतियों का इस्तेमाल कर 30 फीट व्यास वाला भव्य ‘मुंडुकलम’ तैयार किया गया, जिसमें केरल की लोकप्रिय उत्सवी परंपरा और रमराज कॉटन के प्रमुख परिधान धोती को एक नए रूप में प्रस्तुत किया गया।
यह उल्लेखनीय मुंडुकलम 9 अगस्त 2026 को बनाया गया। यह आयोजन केवल आकार के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय वस्त्र परंपराओं के साथ रमराज कॉटन के गहरे जुड़ाव और उन्हें नए, आकर्षक तथा समकालीन रूप में प्रस्तुत करने के ब्रांड के निरंतर प्रयास को भी दर्शाता है। हजारों धोतियों को एक विशाल मुंडुकलम में बदलकर ब्रांड ने केरल की प्रिय उत्सवी परंपरा को धोती की विरासत के साथ एक विशिष्ट नए रूप में पेश किया।
एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का पुरस्कार एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के निर्णायक श्री संजय भोला ने रमराज कॉटन के संस्थापक एवं अध्यक्ष ‘द कल्चरप्रेन्योर’ श्री के.आर. नागराजन और रमराज कॉटन के प्रबंध निदेशक श्री बी.आर. अरुण ईश्वर को प्रदान किया।
इस अवसर पर रमराज कॉटन के संस्थापक एवं अध्यक्ष ‘द कल्चरप्रेन्योर’ श्री के.आर. नागराजन ने कहा, “हमारे लिए धोती केवल एक परिधान नहीं है; यह हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है और पीढ़ियों से चली आ रही एक परंपरा है। इस ओणम पर हम इस जुड़ाव को ऐसे तरीके से मनाना चाहते थे, जिसे लोग अनुभव कर सकें और याद रख सकें। करीब 3,000 धोतियों से मुंडुकलम तैयार करने से हमें ओणम की भावना और धोती की विरासत को एक ही उत्सव में एक साथ लाने का अवसर मिला। हमें गर्व है कि इस पहल को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में मान्यता मिली, लेकिन इससे भी अधिक खुशी इस बात की है कि हमने अपनी परंपराओं को ऐसे रूप में मनाने का अवसर बनाया, जो नया और प्रासंगिक महसूस होता है।”
रमराज कॉटन की स्थापना 1983 में तमिलनाडु के तिरुपुर में ‘द कल्चरप्रेन्योर’ के.आर. नागराजन ने की थी। ब्रांड ने दक्षिण भारत के ग्राहकों तक गुणवत्तापूर्ण पुरुषों के पारंपरिक परिधान पहुंचाने के एकमात्र उद्देश्य के साथ शुरुआत की थी। चार दशकों से अधिक समय में यह ब्रांड पारंपरिक भारतीय परिधानों के क्षेत्र में देश के प्रमुख नामों में शामिल हो गया है। यह अपनी धोतियों के साथ-साथ पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के लिए शर्ट, कुर्ते, तौलिये, विवाह संग्रह, शुद्ध रेशम संग्रह, साड़ियां, कुर्तियां, औपचारिक परिधान, इनर और एक्सेसरीज की विस्तृत श्रृंखला के लिए जाना जाता है। इसके उत्पाद इसके खुदरा नेटवर्क और ramrajcotton.in पर उपलब्ध हैं। संस्थापक एवं अध्यक्ष के.आर. नागराजन के निरंतर नेतृत्व में रमराज कॉटन ने भारत की कम चर्चित हथकरघा और बुनाई परंपराओं को पुनर्जीवित करने और उनका उत्सव मनाने के लिए कई पहल भी की हैं, जिनमें पंचा नवीनतम पहल है।
एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स एक ऐसा मंच है, जहां प्रमुख राष्ट्रीय ‘बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ के रिकॉर्ड धारक, जिनमें ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’, ‘वियतनाम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’, ‘इंडो-चाइना बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’, ‘लाओस बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ और ‘नेपाल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ शामिल हैं, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स धारक का खिताब हासिल करने के लिए तुलना, प्रतिस्पर्धा और दावा करते हैं। वर्तमान में एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के पास 40,000 प्रविष्टियों का मजबूत डेटाबेस है।
एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अनुसार, इसका उद्देश्य लोगों के भीतर छिपी और अप्रयुक्त प्रतिभा को सामने लाने तथा नई संभावनाओं के द्वार खोलने में सहयोग करना है। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स भारत सरकार के साथ पंजीकृत है। यह वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी से संबद्ध है और वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी में राष्ट्रीय रिकॉर्ड पुस्तकों के मुख्य संपादकों की बैठक में बनी सहमति के अनुसार इंटरनेशनल प्रोटोकॉल ऑफ रिकॉर्ड्स (आईपीआर) का पालन करता है।

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