भारत गठबंधन की बैठक के दौरान केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा की गई टिप्पणी ने वाम दलों और कांग्रेस के बीच एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। राहुल गांधी के इस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पोलित ब्यूरो सदस्य एम.ए. बेबी ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने शनिवार को राहुल गांधी से स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें मोदी सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का 'फैसिलिटेटर' यानी मददगार बनना बंद कर देना चाहिए।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब आठ जून को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में वामपंथी नेताओं ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व द्वारा विधानसभा चुनावों के दौरान की गई उस टिप्पणी पर आपत्ति जताई, जिसमें माकपा और भाजपा के बीच कथित मिलीभगत का आरोप लगाया गया था। इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि उनका विजयन के साथ राजनीतिक संघर्ष जारी है, इसलिए वह उनसे 'गले नहीं मिल सकते'। इसी का जवाब देते हुए एम.ए. बेबी ने सोशल मीडिया पर कहा कि कोई भी उनसे पिनाराई विजयन को गले लगाने के लिए नहीं कह रहा है, लेकिन विपक्ष के नेता के रूप में उन्हें विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी की मांग करना शोभा नहीं देता।

बैठक के दौरान माकपा के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि यद्यपि वाम दल कांग्रेस के राजनीतिक आरोपों का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन गठबंधन के प्रमुख चेहरे के रूप में राहुल गांधी द्वारा इस तरह के बयान देना गठबंधन की एकजुटता के लिए उचित नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जब गठबंधन का मुख्य उद्देश्य भाजपा के खिलाफ एक साथ खड़ा होना है, तो सहयोगियों के बीच इस तरह के आपसी आरोप-प्रत्यारोप का क्या औचित्य है। इससे पहले, एम.ए. बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर भी इन आरोपों पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी।

यह घटनाक्रम इंडिया गठबंधन के भीतर बढ़ती आंतरिक चुनौतियों को रेखांकित करता है। एक ओर जहाँ विपक्षी दल एकजुट होकर भाजपा को चुनौती देने की बात कर रहे हैं, वहीं राज्य स्तर के पुराने राजनीतिक मतभेद और वैचारिक टकराव गठबंधन की एकता के मार्ग में बड़ी बाधा साबित हो रहे हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि गठबंधन के घटक दलों के बीच समन्वय और तालमेल का अभाव अभी भी बरकरार है, जिसका असर भविष्य की चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।

Pratahkal Newsroom

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