Rahul Gandhi Lok Sabha speech 2026 : संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन लोकसभा की कार्यवाही उस समय एक भावुक और राजनीतिक विमर्श के केंद्र में तब्दील हो गई, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने संबोधन में अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को याद किया। राहुल गांधी ने बचपन के एक निजी अनुभव को साझा करते हुए बताया कि कैसे उनकी दादी ने उन्हें डर के मनोविज्ञान को समझने और उससे लड़ने की सीख दी थी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जीवन में व्यक्ति महिलाओं—चाहे वह मां हो या बहन—से ही संघर्ष की पहली शिक्षा पाता है। हालांकि, यह भावनात्मक शुरुआत जल्द ही एक प्रखर राजनीतिक हमले में बदल गई, जहाँ राहुल ने सत्ता पक्ष द्वारा पेश किए गए महिला आरक्षण विधेयक के स्वरूप और उसकी मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

राहुल गांधी ने सीधा आरोप लगाया कि जो विधेयक वर्तमान में चर्चा में है, वह वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण का बिल नहीं, बल्कि जनता का ध्यान भटकाने की एक कोशिश है। उन्होंने 2023 में पारित विधेयक का जिक्र करते हुए कहा कि तब सरकार ने इसे दस साल बाद लागू करने की बात कही थी, जो इसकी सार्थकता पर सवाल उठाता है। राहुल ने सत्ता पक्ष पर 'इलेक्टोरल मैप' यानी चुनावी नक्शे को बदलने की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए कहा कि छोटे राज्यों और क्षेत्रीय राजनीतिक हिस्सेदारी को कम करने के प्रयासों को विपक्ष कभी स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार डर की राजनीति कर रही है और लोकतांत्रिक ढांचे के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश हो रही है।

सदन में अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने जाति जनगणना के मुद्दे को महिला आरक्षण से जोड़ते हुए सरकार के सामने कड़ी शर्तें रखीं। उन्होंने गृह मंत्री के बयान का हवाला देते हुए पूछा कि क्या सरकार जाति जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल वास्तविक आरक्षण और प्रतिनिधित्व तय करने में करेगी? राहुल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस विधेयक का पूर्ण समर्थन तभी करेगी जब इसमें ओबीसी और दलित समुदायों की महिलाओं के लिए वास्तविक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि इन समुदायों को केवल नाम के लिए 'हिंदू' कहना और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से वंचित रखना उनके साथ अन्याय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी वंचित वर्गों के अधिकारों पर किसी भी प्रकार के हमले का पुरजोर विरोध करेगी।

अपने भाषण के समापन पर राहुल गांधी ने देश की जनता को आश्वस्त किया कि उनके प्रतिनिधित्व के अधिकार पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने सरकार पर स्पष्टता का दबाव बनाते हुए इसे सामाजिक न्याय की लड़ाई करार दिया। राहुल गांधी के इस प्रखर रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महिला आरक्षण का मुद्दा अब केवल लैंगिक समानता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जातिगत जनगणना और आनुपातिक प्रतिनिधित्व के एक व्यापक राजनीतिक संघर्ष में तब्दील हो चुका है। सदन में दिया गया यह संदेश न केवल सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों की दिशा भी तय करने वाला है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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