शेल्टर होम से भागीं 13 बांग्लादेशी युवतियां ; पुणे के हडपसर में पुलिस की तलाश जारी
पुणे के हडपसर स्थित शेल्टर होम से मानव तस्करी से बचाई गई 13 बांग्लादेशी युवतियां सुनियोजित तरीके से फरार हो गईं। केयरटेकर और गार्ड पर हमले के साथ हुई इस घटना ने सुरक्षा चूक, पुलिस व्यवस्था और पुनर्वास प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुणे के हडपसर स्थित शेल्टर होम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद वह घटना
पुणे के हडपसर-मोहम्मदवाड़ी इलाके से सामने आया एक चौंकाने वाला मामला मानव तस्करी पीड़ितों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यहां एक शेल्टर होम में रह रही 13 बांग्लादेशी युवतियां, जिन्हें हाल ही में मानव तस्करी नेटवर्क से बचाया गया था, सुनियोजित तरीके से फरार हो गईं। इस घटना ने न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि पुनर्वास केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी गहरी चिंता जताई जा रही है।
ये सभी युवतियां एक ऐसे संस्थान में रह रही थीं, जो मानव तस्करी से मुक्त कराई गई महिलाओं के पुनर्वास के लिए जाना जाता है। लेकिन जिस तरह से यह घटना हुई, उसने पूरे सिस्टम की कमजोरियों को सामने ला दिया। घटना की शुरुआत एक सुनियोजित चाल से हुई। एक युवती ने तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर दवा लेने के लिए शेल्टर की केयरटेकर लक्ष्मी कांबले से कमरे का दरवाजा खुलवाने की मांग की। जैसे ही दरवाजा खोला गया, पहले से तैयार खड़ी अन्य युवतियों ने अचानक हमला कर दिया। उन्होंने लक्ष्मी कांबले को काबू में कर बांध दिया और मेडिकल रूम में बंद कर दिया। इसके बाद समूह ने अपनी योजना को अंजाम देना शुरू कर दिया।
Shocker from Pune:
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) April 12, 2026
13 Bangladeshi women, rescued from a human trafficking racket, attacked caretaker Laxmi Kamble at Rescue Foundation shelter in Hadapsar before escaping.
CCTV captured the assault after one feigned illness to get a door opened. Police investigating. pic.twitter.com/4pCB32xsvz
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब भागने के दौरान उन्होंने एक सुरक्षा गार्ड पर भी हमला किया। गार्ड को खींचने और काटने तक की घटना सामने आई, जिससे साफ होता है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं, बल्कि पूरी तरह से पूर्व नियोजित कार्रवाई थी। इस पूरे घटनाक्रम में एक बड़ी सुरक्षा चूक भी सामने आई। जानकारी के अनुसार, उस समय शेल्टर होम का मुख्य गेट साफ-सफाई के चलते खुला रह गया था। इसी मौके का फायदा उठाकर सभी 13 युवतियां परिसर से बाहर निकलने में सफल रहीं।
घटना के बाद पुलिस ने हडपसर और सैयद नगर सहित आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। अब तक दो युवतियों को ढूंढ लिया गया है, जबकि 11 अभी भी लापता हैं। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर घटना के बावजूद अभी तक कोई औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है और मामला केवल जनरल डायरी एंट्री तक सीमित रखा गया है।
इस बीच शेल्टर संचालित करने वाले संगठन ने भी कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। संस्था का कहना है कि मार्च 2024 में पुलिस सुरक्षा हटा ली गई थी, जबकि इसे बहाल करने के लिए कई बार अनुरोध किया गया था। इसके अलावा शेल्टर में अत्यधिक भीड़ की समस्या भी सामने आई है। यहां रह रही कई महिलाएं विदेशी नागरिक हैं, जो अपने देश वापस भेजे जाने की प्रक्रिया का इंतजार कर रही हैं। यह प्रक्रिया अक्सर दो साल तक खिंच जाती है, जिससे उनमें मानसिक तनाव और अस्थिरता बढ़ती है।
यह घटना केवल एक फरारी का मामला नहीं, बल्कि उन खामियों की ओर इशारा करती है जो मानव तस्करी पीड़ितों के पुनर्वास और सुरक्षा से जुड़े सिस्टम में गहराई तक मौजूद हैं। पुणे में हाल के महीनों में बांग्लादेशी महिलाओं को तस्करी और देह व्यापार के नेटवर्क से बचाने के कई मामले सामने आए हैं, जो इस समस्या के अंतरराष्ट्रीय और संगठित स्वरूप को दर्शाते हैं।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
