भारतीय समुद्री इतिहास में एक अहम पड़ाव मंगलवार को दर्ज हुआ, जब अत्याधुनिक तकनीक से लैस नीलगिरी-वर्ग (प्रोजेक्ट 17A) की चौथी स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘तरागिरी’ को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया। आधुनिक युद्धक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निर्मित यह युद्धपोत न केवल देश की रणनीतिक तैयारी को मजबूत करता है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता का भी सशक्त प्रमाण प्रस्तुत करता है।

‘तरागिरी’ का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा किया गया है, जो स्वदेशी रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठित संस्था मानी जाती है। इस प्रोजेक्ट के तहत बनाए जा रहे सातों उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट्स भारतीय नौसेना की भविष्य की युद्धक क्षमता की रीढ़ माने जा रहे हैं। इन जहाजों को कम रडार सिग्नेचर, बेहतर मारक क्षमता और बहुआयामी मिशन संचालन के अनुरूप डिजाइन किया गया है।

जहाज के निर्माण में अत्याधुनिक स्टील्थ टेक्नोलॉजी, उन्नत सेंसर, मिसाइल सिस्टम, आधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली और बहु-भूमिका निभाने वाले हेलीकॉप्टरों के संचालन की क्षमता शामिल है। ‘तरागिरी’ आधुनिक समुद्री युद्धक परिस्थितियों में दुश्मन की पहचान और उसका सटीकता से मुकाबला करने में बेहद सक्षम है। इसकी डिजाइन समुद्री सुरक्षा, निगरानी, एंटी-सरफेस, एंटी-सबमरीन तथा एंटी-एयर मिशनों को प्रभावी रूप से संभालने में सक्षम बनाती है।

प्रोजेक्ट 17A भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मेक इन इंडिया’ एवं ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का प्रमुख हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट के तहत नौसेना को सौंपे गए जहाज न केवल भारत की तकनीकी दक्षता का उदाहरण हैं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति का भी संकेत देते हैं। रक्षा मंत्रालय एवं नौसेना के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी में हुई यह डिलीवरी प्रक्रिया भारतीय शिपबिल्डिंग क्षमता में विश्वास को और मजबूत करती है।

‘तरागिरी’ की सुपुर्दगी ऐसे समय में हुई है जब हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक गतिविधियाँ तेज गति से बदल रही हैं। ऐसे में भारत के लिए एक सशक्त, आधुनिक और तकनीकी रूप से सुदृढ़ नौसेना का होना अत्यंत आवश्यक है। इस युद्धपोत के शामिल होने से न केवल नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ेगी, बल्कि समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, रणनीतिक मिशनों के संचालन और आपदा राहत अभियानों में भी उल्लेखनीय मजबूती मिलेगी।

डिलीवरी के साथ ही ‘तरागिरी’ भारतीय जलसीमा की सुरक्षा के लिए एक नए प्रहरी के रूप में तैयार खड़ी है। यह स्वदेशी निर्माण क्षमता, तकनीकी श्रेष्ठता और सामरिक संकल्प का ऐसा संगम है जो आने वाले वर्षों में भारत की समुद्री शक्ति को एक नई दिशा देगा।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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