प्री-बजट बैठक में हलचल तेज; वित्त मंत्री ने MSME सेक्टर से की अहम मुलाकात
नई दिल्ली में वित्त मंत्री ने आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए MSME सेक्टर के प्रतिनिधियों के साथ तीसरी प्री-बजट बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उद्योग सुधार, निवेश माहौल और नीतिगत सरलीकरण पर चर्चा हुई। सरकार छोटे और मध्यम उद्योगों को बजट में विशेष प्रोत्साहन देने की तैयारी में है।

आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 की तैयारियों के बीच बुधवार को नई दिल्ली में वित्त मंत्री ने तीसरी प्री-बजट बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और उद्योग जगत से जुड़े विभिन्न सुझावों पर विस्तृत चर्चा हुई। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह बैठक बजट प्रक्रिया का एक अहम चरण थी, जिसका उद्देश्य देश के उद्योग और उद्यम क्षेत्र की आवश्यकताओं को समझते हुए नीतिगत दिशा तय करना है।
वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह बैठक MSME क्षेत्र की नीतियों को सुदृढ़ करने और बजट में उनके सुझावों को शामिल करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। बैठक में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
सरकार की यह पहल व्यापक बजट परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत वित्त मंत्री विभिन्न उद्योगों, संगठनों और विशेषज्ञों के साथ लगातार विचार-विमर्श कर रही हैं। इससे पहले, वित्त मंत्री ने कृषि क्षेत्र और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा की थी, जिसमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के उपायों पर विचार हुआ था।
इस बीच, एसोचैम की एक ताज़ा रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि देशभर में MSME निवेश माहौल को बेहतर बनाने के लिए डिजिटलीकृत और समयबद्ध सिंगल-विंडो क्लियरेंस सिस्टम लागू किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि व्यावसायिक नियमों के सरलीकरण और अनुमोदन प्रक्रियाओं में सुधार से छोटे उद्योगों की वृद्धि में गति आ सकती है।
रिपोर्ट ने कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत MSME के लिए अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में द्विवार्षिक या त्रैवार्षिक फाइलिंग साइकिल लागू करने का सुझाव भी दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सुधार न केवल प्रशासनिक बोझ कम करेंगे बल्कि निवेश और नवाचार के लिए एक अनुकूल माहौल भी तैयार करेंगे।
गौरतलब है कि वित्त मंत्री ने इससे पहले प्रमुख अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों के साथ पहली प्री-बजट बैठक की थी। इन बैठकों से प्राप्त सुझाव आगामी बजट की नीतिगत प्राथमिकताओं को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
देश के आर्थिक पुनरुद्धार के इस दौर में MSME सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में सरकार की यह बातचीत संकेत देती है कि आगामी बजट में छोटे और मध्यम उद्योगों को विशेष प्राथमिकता मिल सकती है। यह वही क्षेत्र है जो न केवल रोजगार सृजन में बल्कि भारत की औद्योगिक प्रगति में भी रीढ़ की हड्डी का काम करता है।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
