उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में भीषण गर्मी के कारण पेयजल का गंभीर संकट पैदा हो गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों में टैंकरों के जरिए आपूर्ति की जा रही है।

Prayagraj water shortage heatwave : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में आसमान से बरसती आग और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बीच अब एक भीषण मानवीय संकट खड़ा हो गया है। समूचे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले चुकी भीषण हीटवेव (लू) के बीच जिले के हजारों नागरिक इस समय पानी की गंभीर किल्लत से जूझ रहे हैं। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि प्रभावित इलाकों से सामने आ रहे वीडियो और तस्वीरें प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही हैं। इन वीडियो में स्थानीय परिवारों को पानी की तलाश में मीलों पैदल चलते और सूखे पड़ चुके नदी-नालों या उथले झरनों के गंदे पानी को बर्तनों में सहेजते हुए देखा जा सकता है। भीषण तपिश के बीच पानी के लिए मची यह हाहाकार अब स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है और जनता का सब्र टूट रहा है।

इस विकट स्थिति के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और जल विभाग हरकत में आया है। आपातकालीन प्रतिक्रिया के तहत प्रभावित क्षेत्रों में पानी के टैंकरों को तैनात किया जा रहा है और खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। हालांकि, ग्राउंड रियलिटी यह है कि इन उपायों की आवश्यकता को लेकर लगभग तीन सप्ताह पहले ही जिला प्रशासन को अलर्ट जारी कर दिया गया था। समय रहते कदम न उठाए जाने के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में पानी की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बहुत बड़ा हो गया है। वर्तमान में सरकारी टैंकरों के पहुंचते ही पानी के लिए लोगों की लंबी कतारें और अफरा-तफरी का माहौल आम बात हो चुकी है।

इस जल संकट ने केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जल जीवन मिशन के तहत साल 2019 से अब तक उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में नल के पानी की कवरेज को 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 81.81 प्रतिशत तक पहुंचा दिया गया है। आंकड़ों के लिहाज से यह एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है, जिसका सरकारी समर्थक और अधिकारी लगातार जिक्र कर रहे हैं। उनका तर्क है कि पिछले दशकों की तुलना में वर्तमान समय में ग्रामीण जल बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व प्रगति हुई है और हजारों गांवों तक पहली बार पाइपलाइन पहुंची है।

इसके विपरीत, आलोचकों और जमीनी हकीकत पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि कागजी आंकड़ों और वास्तविक आपूर्ति के बीच एक बहुत बड़ी खाई बनी हुई है। आलोचकों का आरोप है कि पाइपलाइन बिछाए जाने के बावजूद कई स्थानीय इलाकों में तकनीकी खामियों, सूखे जल स्रोतों और बिजली की अनियमतता के कारण नलों में पानी नहीं आ रहा है। हीटवेव के दौरान पानी की मांग अचानक बढ़ने से यह ढांचागत कमियां पूरी तरह उजागर हो गई हैं। बुनियादी ढांचे के विस्तार के बाद भी स्थानीय स्तर पर रह गए ये अंतर इस भीषण गर्मी में जनता के लिए बड़ी मुसीबत का सबब बन गए हैं।

प्रयागराज का यह वर्तमान संकट केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी गंभीर संकेत है कि भविष्य में जलवायु परिवर्तन और हीटवेव के कारण पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए हमारे पास पुख्ता बैकअप प्लान होना कितना जरूरी है। केवल बुनियादी ढांचा तैयार करना काफी नहीं है, बल्कि संकट के समय उसकी निरंतरता बनाए रखना असली परीक्षा है। यदि आने वाले दिनों में गर्मी का प्रकोप कम नहीं हुआ और पानी की आपूर्ति में सुधार नहीं किया गया, तो यह संकट जन स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। फिलहाल, संगम नगरी के हजारों नागरिक प्रशासन की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं कि कब उनकी प्यास बुझाने के लिए स्थाई समाधान निकाला जाएगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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