इंस्टाग्राम पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' अभियान से 20 मिलियन लोगों के जुड़ने पर जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने व्यवस्था के खिलाफ जन-आक्रोश की बात कही।

Cockroach Janta Party Instagram campaign : बिहार की राजनीतिक जमीन पर इन दिनों एक अजीबोगरीब सोशल मीडिया अभियान और जमीनी चुनावी बिसात ने सत्ता के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। हाल ही में डिजिटल दुनिया में तेजी से उभरी 'कॉकरोच जनता पार्टी' को लेकर जारी चर्चाओं के बीच जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने एक बेहद गंभीर और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बयान देकर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। झंझारपुर में मीडिया से औपचारिक बातचीत के दौरान उन्होंने इस ऑनलाइन ट्रेंड के पीछे छिपे गहरे जन-आक्रोश को रेखांकित किया, जो आने वाले समय में राज्य की स्थापित राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

इस डिजिटल घटनाक्रम की गहराई को स्पष्ट करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि यह अभियान फिलहाल किसी औपचारिक या पंजीकृत राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं है। न तो इस तथाकथित दल की कोई लिखित नीति सामने आई है और न ही इसके नेतृत्व या चेहरे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध है। इसके बावजूद, इंस्टाग्राम जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर महज एक ऑनलाइन कैंपेन के तहत लगभग दो करोड़ (20 मिलियन) लोगों का जुड़ना बेहद असाधारण है। पीके के अनुसार, यदि इतनी विशाल संख्या में नागरिक किसी मंच पर एकत्रित होकर सरकार और मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं, तो यह मौजूदा हुकूमत के लिए आत्मचिंतन और गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग वर्तमान शासन प्रणाली और नीतिगत फैसलों से पूरी तरह असंतुष्ट है।

इस वैचारिक विमर्श के बीच बिहार की चुनावी राजनीति से जुड़ी एक और बड़ी हलचल सामने आई है, जो बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव से जुड़ी है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस हाई-प्रोफाइल सीट पर जन सुराज की रणनीति को लेकर कयासों का बाजार गर्म था। इन कयासों पर विराम लगाते हुए प्रशांत किशोर ने आधिकारिक पुष्टि की कि बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगा और इस पर पार्टी के भीतर पूर्ण सहमति बन चुकी है। उन्होंने पुरजोर दावा किया कि बांकीपुर के राजनीतिक समीकरणों के बीच यदि कोई ताकत भारतीय जनता पार्टी को शिकस्त देने का माद्दा रखती है, तो वह केवल जन सुराज ही है। स्थानीय जनता के बढ़ते भरोसे के बीच पार्टी एक बेहद मजबूत और जिताऊ उम्मीदवार को मैदान में उतारेगी, जिसका अंतिम फैसला केंद्रीय चयन समिति द्वारा किया जाएगा।

स्वयं के चुनाव न लड़ने के पुराने रुख और वर्तमान भूमिका पर स्पष्टीकरण देते हुए प्रशांत किशोर ने सांगठनिक जिम्मेदारी के सिद्धांतों को सामने रखा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बदलाव की लड़ाई में हर बड़े चेहरे का चुनावी मैदान में उतरना अनिवार्य नहीं होता, बल्कि पर्दे के पीछे से रणनीतिक कमान संभालना भी जिम्मेदारी उठाने का एक सशक्त माध्यम है। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान समय की भारी कमी और सांगठनिक बाध्यताओं के कारण उन्होंने चुनाव न लड़ने का नीतिगत निर्णय लिया था। भविष्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत पार्टी जो भी सामूहिक निर्णय लेगी, उसका पूरी निष्ठा से पालन किया जाएगा।

इसके साथ ही, राजनीतिक गलियारों में उड़ रही उन अफवाहों पर भी पूर्ण विराम लग गया जिनमें प्रशांत किशोर के आश्रम प्रवास और जन सुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह के एक साल के अवकाश को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे। पीके ने स्पष्ट किया कि ये दोनों पूरी तरह से अलग और व्यक्तिगत मामले हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद भितिहरवा आश्रम में रखे गए एक दिवसीय मौन उपवास के समय ही यह संकल्प लिया गया था कि सरकार गठन के शुरुआती छह महीनों तक संगठन के पुनर्गठन का काम किया जाएगा। छह महीने की अवधि समाप्त होने के बाद, प्रतिज्ञा के अनुसार २० मई से वह किसी भी निजी या आवासीय परिसर को छोड़कर सीधे समाज के बीच आश्रम में रह रहे हैं, और यह प्रवास बिहार के नवनिर्माण अभियान की शुरुआत तक जारी रहेगा। वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह के संदर्भ में उन्होंने साफ किया कि वह संगठन के बेहद वरिष्ठ मार्गदर्शक हैं और उन्होंने विशुद्ध रूप से व्यक्तिगत कारणों से एक वर्ष का राजनीतिक अवकाश लिया है, परंतु वह आज भी जन सुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं और उनके सांगठनिक दर्जे में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

प्रशांत किशोर के इन बयानों और सांगठनिक बदलावों ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की राजनीति अब परंपरागत ढर्रे से निकलकर एक नए डिजिटल और वैचारिक दौर में प्रवेश कर चुकी है। दो करोड़ लोगों का ऑनलाइन विरोध और जमीनी स्तर पर जन सुराज का आश्रम से संचालित होने वाला नवनिर्माण अभियान यह संकेत देता है कि आने वाले उपचुनाव और भविष्य की चुनावी जंग बेहद अप्रत्याशित और आक्रामक होने वाली है, जहां सोशल मीडिया के आक्रोश को वोट बैंक में बदलने की एक मौन लेकिन बेहद गंभीर कोशिश की जा रही है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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