दिल्ली‑एनसीआर में जनवरी 2026 की शुरुआत भी वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या के साथ हुई है। राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार बढ़ते हुए खतरनाक स्तरों के करीब पहुँच गया है। मौसम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नागरिकों को स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है।

दिल्ली‑एनसीआर में ठंडी हवाओं और कम दृश्यता वाले मौसम के कारण प्रदूषण कण फैलने में अधिक सक्षम हो गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वाहनों से निकलने वाला धुआँ, निर्माण कार्यों से उठता धूल‑कण और आसपास के राज्यों से बहकर आने वाले प्रदूषक कणों ने मिलकर वायु की गुणवत्ता को बेहद खराब कर दिया है। आज सुबह दिल्ली‑एनसीआर में AQI 480 के पास पहुँच गया, जो “गंभीर” श्रेणी के अंतर्गत आता है।

डॉ. प्रिया वर्मा, पर्यावरण विशेषज्ञ, कहती हैं कि “यह समय विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन संबंधी समस्याओं वाले मरीजों के लिए खतरनाक है। घरों के भीतर भी एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना, मास्क पहनना और अनावश्यक बाहरी गतिविधियों से बचना जरूरी है।” उन्होंने बताया कि लंबे समय तक इस प्रकार की हवा में रहने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने राज्य सरकार को सिफारिशें भेजते हुए कहा है कि निर्माण स्थलों, सड़कों और औद्योगिक क्षेत्रों में नियंत्रण बढ़ाया जाए। विशेष रूप से पथ निर्माण और धूल उठाने वाले कार्यों पर अस्थायी रोक लगाई जा सकती है। इसके अलावा, वाहन चालकों को भी सलाह दी गई है कि वे वाहनों को कम चलाएं और सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक उपयोग करें।

दिल्ली‑एनसीआर में प्रदूषण का यह संकट मुख्यतः पश्चिमी विक्षोभ और स्थिर मौसम प्रणाली के कारण पैदा हुआ है। ठंडी हवाओं के साथ धूप की कमी से वायु प्रदूषक कण ऊँचाई पर नहीं फैल पाते और धरातल के करीब जमा हो जाते हैं। इस वजह से सुबह‑शाम की समयावधि में धुंध और धुएँ का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को आगाह किया है कि बाहर निकलते समय N95 मास्क का उपयोग करें और व्यायाम या लंबी दूरी की दौड़ जैसी गतिविधियों को कम करें। स्कूलों और कॉलेजों को भी छात्रों के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने और आवश्यक होने पर ऑनलाइन कक्षाओं पर विचार करने की सलाह दी गई है।

ट्रैफिक पुलिस ने भी वाहन चालकों को सलाह दी है कि सुबह‑शाम के समय वाहन चलाते समय फॉग लाइट्स का उपयोग करें, गति नियंत्रित रखें और वाहन की दूरी बनाए रखें। उन्होंने चेताया कि प्रदूषण और कोहरे की संयुक्त स्थिति में सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 48 से 72 घंटों में दिल्ली‑एनसीआर में प्रदूषण का स्तर स्थिर रह सकता है, लेकिन खतरनाक श्रेणी से नीचे आने की संभावना नहीं है। इसके लिए राज्य सरकार और नागरिकों दोनों की ओर से सतर्कता और संयुक्त प्रयास जरूरी हैं।

इस संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली‑एनसीआर में वायु प्रदूषण एक स्थायी चुनौती है। प्रदूषण नियंत्रण, सार्वजनिक जागरूकता और उचित नीति निर्माण ही इसे नियंत्रित करने की दिशा में अहम कदम हैं। यदि जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

Pratahkal Hub

Pratahkal Hub

प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"

Next Story