स्वच्छता में नंबर 1 शहर में 'ज़हरीला पानी'? क्या भागीरथपुरा की मौतों के बाद जागेगा सोया हुआ प्रशासन?
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित नल का पानी पीने से कम से कम सात लोगों की मौत और 1,100 से अधिक लोग बीमार पड़े हैं। मेयर पुष्यामित्र भार्गव और मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रतिक्रियाओं के बीच प्रशासन ने अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है और हाईकोर्ट ने स्वच्छ पानी की आपूर्ति के निर्देश जारी किए हैं।

इंदौर: मध्य प्रदेश का इंदौर, जिसे लंबे समय तक देश का सबसे साफ़ शहर कहा जाता रहा है, अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है। भागीरथपुरा इलाके में कथित रूप से दूषित नल के पानी के सेवन से कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है और 1,100 से अधिक लोग उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी लक्षणों के साथ बीमार हैं, जिससे शहर में चिंता की लहर दौड़ गई है।
भागीरथपुरा इलाके में पिछले एक सप्ताह से लगातार अस्वस्थता की शिकायतें सामने आने लगीं, जिनमें लोग कथित तौर पर दूषित पानी के सेवन के बाद डायरिया, उल्टी और निर्जलीकरण की समस्या से ग्रस्त हुए। इंदौर के मेयर पुष्यामित्र भार्गव ने संवाददाताओं को बताया कि “स्वास्थ्य विभाग ने आधिकारिक तौर पर तीन मौतों की पुष्टि की है, लेकिन मेरे पास जानकारी है कि कुल सात लोगों की मौत इसी जल संकट के कारण हुई है।” उन्होंने यह भी बताया कि इसके अलावा कई अन्य लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, जांच में प्रारंभिक संकेत मिले हैं कि एक मुख्य जल आपूर्ति पाइपलाइन के नीचे बने शौचालय की निकासी पाइपलाइन से लीकेज के कारण पानी दूषित हो गया। इस लीकेज से सीवर वेस्ट पीने के पानी में मिल गया, जिससे वह जहरीला मिश्रण बन गया था। इंदौर नगर निगम के आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने बताया कि लीकेज की जाँच की जा रही है और पानी के नमूनों की जांच की प्रक्रिया जारी है।
जाँच से पता चला है कि मुख्य लाइन पर पाइप के एक हिस्से पर शौचालय के ऊपर निर्यात पाइप का प्रभाव रहा, जिसके कारण सीवर वेस्ट की कुछ मात्रा पीने के पानी में मिल गई। प्रारंभिक रूप से यह मिली जानकारी स्वास्थ्य विभाग को मिली और स्थानीय अधिकारियों ने राहत-कार्य शुरू कर दिया।
जिला दंडाधिकारी शिवम वर्मा ने बताया कि 149 से अधिक मरीजों को शहर के 27 अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि मरीजों को उल्टी और डायरिया से राहत देने वाली प्राथमिक उपचार सुविधा उपलब्ध करवाई जा रहा है, जबकि गंभीर मामलों में अस्पतालों में चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस त्रासदी पर गहरा दुख जताया और मृतकों के परिजनों को प्रत्येक के लिए दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार सभी प्रभावित व्यक्तियों का इलाज अपनी ओर से कराएगी, ताकि कोई भी व्यक्ति आर्थिक बोझ के कारण स्वास्थ्य सहायता से वंचित न रहे।
घटना के बाद प्रशासन ने तीव्र कार्रवाई भी शुरू कर दी है। भागीरथपुरा इलाके के नगर निगम के एक क्षेत्रीय अधिकारी और एक सहायक अभियंता को तुरंत निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक उप-अभियंता को सेवा से हटा दिया गया है। इस कार्रवाई का उद्देश्य स्पष्ट है कि ऐसी चूक के लिए उत्तरदायी किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज़ हैं। राज्य कांग्रेस प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला ने आरोप लगाया कि प्रशासन वास्तविक मौतों की संख्या को छुपा रहा है और इसे “भयानक लापरवाही” का मामला बताया। उन्होंने कहा कि यह घटना राष्ट्रीय स्वच्छता रैंकिंग में शीर्ष स्थान रखने वाले शहर की छवि पर काला धब्बा है। The Week
इंदौर हाईकोर्ट ने भी इस मामले में संज्ञान लेते हुए प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित इलाकों में फौरन स्वच्छ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और सभी पीड़ितों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सहायता प्रदान की जाए। हाईकोर्ट ने 2 जनवरी 2026 तक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। The Times of India
राज्य सरकार ने चिकित्सा सहायता के लिए पूरे शहर में स्वास्थ्य शिविर लगा दिए हैं और घर-घर बूथों के माध्यम से प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि बीमारी के प्रभाव को सीमित किया जा सके। इंदौर नगर निगम ने साफ पानी की तत्काल आपूर्ति के लिए 20 से अधिक पानी टैंकर तैनात किए हैं। The Times of India
इस भयावह घटना ने शहर के नागरिकों और विशेषज्ञों में चिंता बढ़ा दी है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा, जल स्रोतों की निगरानी और बुनियादी ढांचे की मरम्मत में गंभीर सुधार की आवश्यकता है। स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिए किये गये प्रयासों के बीच यह संकट शहरी नियोजन और जल प्रबंधन में गहरे भेद को उजागर करता है, जिसे जल्द से जल्द संबोधित करने की मांग उठ रही है।

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