आम आदमी की जेब पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'! सिलेंडर के साथ-साथ 'इन' जरूरी चीजों के दाम भी आसमान पर...
LPG सिलेंडर के दाम बढ़ने के साथ देश में महंगाई का दबाव और गहरा गया है। खाद्य तेल, सब्जियां, दालें, दूध, डेयरी उत्पाद, दवाइयां और बिजली बिल तक महंगे हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार, सप्लाई चेन की दिक्कतों, परिवहन लागत और WPI में बदलाव के कारण आम आदमी के घरेलू बजट पर कई मोर्चों से आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

देश में महंगाई ने आम आदमी की रसोई से लेकर पूरे घर के बजट तक पर दबाव बढ़ा दिया है। LPG सिलेंडर के दामों में उछाल के साथ-साथ अब कई अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। हाल के दिनों में खाद्य तेल, सब्जियां, फल, दालें, अनाज, दूध, डेयरी उत्पाद, दवाइयां और बिजली के बिल में बढ़ोतरी ने मध्यम वर्ग की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।
खाद्य तेल और घी की कीमतों में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की दिक्कतें बताई जा रही हैं। इसके चलते सरसों का तेल, रिफाइंड ऑयल और मूंगफली के तेल के दामों में लगभग 10% से 15% तक की वृद्धि दर्ज की गई है। डेयरी कंपनियों ने दूध के दाम बढ़ाने के बाद घी और पनीर की कीमतों में भी इजाफा कर दिया है, जिससे रसोई का खर्च और बढ़ गया है।
सब्जियों और फलों की कीमतों में भी तेज उछाल दर्ज किया गया है। बेमौसम बरसात और परिवहन लागत बढ़ने के कारण मंडियों में सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है। वहीं हरी सब्जियां सामान्य कीमतों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक महंगी बिक रही हैं।
दालों और अनाज के बाजार में भी तेजी बनी हुई है। अरहर (तुअर) और उड़द की दाल की कीमतों में पिछले कुछ महीनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही चावल और गेहूं की प्रीमियम वैरायटी भी अब पहले के मुकाबले अधिक कीमत पर मिल रही हैं, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
डेयरी क्षेत्र में भी महंगाई का असर साफ दिखाई दे रहा है। अमूल और मदर डेयरी जैसी बड़ी कंपनियों ने चारे की लागत बढ़ने का हवाला देते हुए पिछले कुछ समय में दूध की कीमतों में ₹2 से ₹3 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है। दूध के दाम बढ़ने का सीधा असर दही और अन्य डेयरी उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी राहत नहीं है। सालाना थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में बदलाव के कारण कई आवश्यक दवाओं की कीमतों में 10% से 12% तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इनमें पेनकिलर्स, एंटीबायोटिक्स और दिल की बीमारियों से जुड़ी दवाएं शामिल हैं, जिससे मरीजों का इलाज खर्च भी बढ़ गया है।
इसके अलावा कई राज्यों में बिजली कंपनियों ने फ्यूल सरचार्ज या फिक्स्ड चार्ज के नाम पर यूनिट की दरें बढ़ा दी हैं। गर्मियों के मौसम के करीब आते ही बढ़े हुए बिजली बिलों ने मध्यम वर्ग के बजट को और अधिक प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
इस तरह LPG सिलेंडर की कीमतों में उछाल के साथ खाद्य सामग्री, डेयरी उत्पाद, दवाइयों और बिजली के बढ़ते खर्च ने आम आदमी के घरेलू बजट पर एक साथ कई मोर्चों से दबाव बना दिया है, जिससे महंगाई का असर अब जीवन के लगभग हर जरूरी हिस्से में महसूस किया जा रहा है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
