parliament winter session 2025 : राहुल गांधी का आरोप; ‘इलेक्शन कमीशन भी RSS के निशाने पर!
parliament winter session 2025 : संसद के शीतकालीन सत्र में चुनाव सुधारों पर ऐतिहासिक बहस तेज हो गई, जहां राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने नेहरू, चुनाव आयोग और संस्थागत हस्तक्षेप पर गंभीर आरोप लगाए। सरकार ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए SIR प्रक्रिया को पारदर्शिता सुनिश्चित करने का कदम बताया। सदन में तीखे आरोप-प्रत्यारोप से राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया।

parliament winter session 2025
parliament winter session 2025 : संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार का दिन राजनीतिक टकराव, आरोपों की बौछार और संवैधानिक संस्थाओं पर छिड़ी असलियत बनाम आरोपों की बहस से भर गया। चुनाव सुधारों पर केंद्रित इस बहुप्रतीक्षित चर्चा ने अचानक ऐतिहासिक संदर्भों, वैचारिक संघर्ष और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर नियंत्रण के आरोपों को घेरते हुए एक व्यापक राजनीतिक संग्राम का रूप ले लिया।
राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि नेहरू को निशाना बनाकर स्वतंत्रता आंदोलन के सभी महापुरुषों का अपमान किया जा रहा है। खड़गे ने 1937 की उन ऐतिहासिक चिट्ठियों का उल्लेख किया, जिनमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस, रवींद्रनाथ टैगोर और जवाहरलाल नेहरू के बीच वंदे मातरम पर विमर्श हुआ था। उन्होंने कहा कि सभी वरिष्ठ नेताओं के सामूहिक निर्णय को तोड़कर नेहरू को दोष देना इतिहास के साथ छल करने जैसा है। खड़गे ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष "महापुरुषों की विरासत को छोटा करके नए आख्यान गढ़ना चाहता है।"
इस दौरान खड़गे के कई बयान सदन में तीखी नोकझोंक का कारण बने। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी की लड़ाई में योगदान देने वालों के प्रति “अपमानजनक रवैया” अपनाया जा रहा है और कहा कि “हमने देश के लिए काम किया, आपके घर नौकरी करने नहीं।” खड़गे ने चीन से जुड़े हालात, रुपये की गिरावट और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार के रुख को भी कठघरे में खड़ा किया। उनके इन बयानों पर सदन में हंगामा हुआ और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने खड़गे को टोकते हुए कहा कि बहस को "निर्धारित मुद्दे पर सीमित रखा जाए।"
लोकसभा में माहौल तब और गरमा गया जब चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आरएसएस “देश के सभी संस्थानों पर कब्जा करना चाहता है।” उन्होंने दावा किया कि भारत की चुनावी प्रणाली के प्रमुख स्तंभों—चुनाव आयोग, मतदाता सूची और नियुक्ति प्रक्रियाओं—पर राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि “चुनाव आयोग पर सत्ता का प्रभाव स्पष्ट है” और आरोप लगाया कि “वोट चोरी” और “डुप्लीकेट वोटर” की शिकायतों पर आयोग ने उनके सवालों का जवाब नहीं दिया।
उन्होंने हरियाणा और बिहार के उदाहरण देते हुए कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद भी हजारों डुप्लीकेट फोटो मतदाता सूची में मौजूद थीं। राहुल ने यह भी कहा कि दिसंबर 2023 में चुनाव आयुक्तों को इम्यूनिटी देने और CJI को चयन प्रक्रिया से हटाने का कानून “चुनाव आयोग पर कब्जा करने की रणनीति” का हिस्सा है। किरेन रिजिजू ने बीच में टोकते हुए कहा कि राहुल विषय से भटके हैं, जिसके बाद सदन में और शोरगुल शुरू हो गया। राहुल ने जवाब दिया कि वे “संस्थागत कब्जे” पर ही बोलेंगे।
साल के सबसे बड़े चुनावी विधायी विमर्श में सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल अपनी दलीलें रखेंगे। वहीं विपक्ष की ओर से राहुल गांधी और अखिलेश यादव इस बहस को व्यापक लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदाता संरक्षण के प्रश्न से जोड़ने की तैयारी में हैं।
सरकार का रुख स्पष्ट है कि SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को “शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाना” है। जबकि विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं, विशेषकर उन वर्गों के जो पारंपरिक रूप से विपक्ष का समर्थन करते हैं। इस 10 घंटे लंबी बहस ने पहले ही संसद का राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है, जिसके आगे और गर्माने के संकेत स्पष्ट हैं।
चुनाव सुधारों का यह ऐतिहासिक विमर्श केवल तकनीकी प्रक्रिया का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि आज यह प्रश्न बन चुका है कि भारत का लोकतंत्र और उसके संस्थान किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
