Parliament Winter Session 2025 : संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार को अपने छठे दिन पर पहुँचा, और लोकसभा में 'वंदे मातरम' के 150वीं वर्षगांठ पर विशेष चर्चा ने सदन को ऐतिहासिक गरमागरमी में बदल दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय गीत न केवल स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरक मंत्र रहा है, बल्कि देशवासियों को एकजुट करने वाली शक्ति भी है। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम की उत्पत्ति 1875 में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा की गई थी और यह केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था, बल्कि मातृभूमि की रक्षा और समाज की सांस्कृतिक चेतना को जगाने वाला गान भी था।

प्रधानमंत्री ने सदन को याद दिलाया कि जब वंदे मातरम के 100 साल पूरे हुए, तब देश आपातकाल और अत्याचार के दौर से गुजर रहा था, और संविधान को जंजीरों में जकड़ा गया था। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा वंदे मातरम पर लगाए गए प्रतिबंधों और स्वतंत्रता सेनानियों की वीरता का विवरण देते हुए कहा कि बच्चों, महिलाओं और युवाओं ने इस गीत के लिए जीवन तक आहुति दी। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि यह गीत लंदन और पेरिस तक गूंजा, जहां वीर सावरकर और भीकाजी कामा ने इसे प्रसारित किया।

लोकसभा में विपक्ष ने इंडिगो संकट और अन्य मुद्दों पर हंगामा किया, जबकि कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री मोदी को जवाब देते हुए कहा कि नेहरू जी के योगदान पर कोई काला दाग नहीं लगाया जा सकता। गौरव गोगोई ने मुस्लिम लीग के वंदे मातरम बहिष्कार और मौलाना आजाद के दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डाला।

भाजपा सांसदों ने भी वंदे मातरम के महत्व को रेखांकित किया। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गीत की आजादी के प्रतीक के रूप में भूमिका बताई, कंगना रनौत ने कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया, अरुण गोविल ने इसे देश की संस्कृति और गौरव बताया, जबकि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे देशभक्ति की भावना का स्वर कहा।

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में सामाजिक न्याय के लिए सरकार की नीतियों से लाभ पहुंचा है, और अब तक 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। वंदे मातरम पर तीन घंटे की विशेष चर्चा सत्ताधारी और विपक्ष के बीच मतभेदों के बीच संपन्न हुई, जबकि राज्यसभा में मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा भी इस पर अपने विचार रखेंगे।

इस बहस ने न केवल राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को उजागर किया, बल्कि यह भी प्रदर्शित किया कि स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा आज भी सदन और समाज में उतनी ही जीवंत है। वंदे मातरम ने सदियों से देशवासियों को साहस, प्रेरणा और गर्व का अनुभव कराया है और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसकी शिक्षा और महत्व हमेशा प्रासंगिक रहेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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