राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह के पहले चरण में कला, खेल और समाज सेवा क्षेत्र के जमीनी नायकों को राष्ट्रीय सम्मान दिया गया।

Padma Awards 2026 : राष्ट्रपति भवन का ऐतिहासिक दरबार हॉल एक बार फिर देश की उन महान शख्सियतों की गौरवगाथा का गवाह बना, जिन्होंने अपने असाधारण योगदान से राष्ट्र का नाम रोशन किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नागरिक अलंकरण समारोह के पहले चरण में कला, खेल, समाज सेवा और संस्कृति जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 66 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस साल जनवरी में घोषित कुल 131 पद्म पुरस्कारों में से पांच पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं, जिनमें से पहले बैच के विजेताओं को आज राष्ट्रपति के हाथों यह सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुआ। राष्ट्रपति भवन के गलियारे उस वक्त तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठे जब कला और खेल जगत की नामचीन हस्तियों के साथ-साथ देश के सुदूर कोनों से आए गुमनाम नायकों ने मंच पर कदम रखा।

समारोह के सबसे भावुक और यादगार पलों में से एक तब देखा गया जब दिवंगत बॉलीवुड महानायक धर्मेंद्र को मरणोपरांत दिए गए देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पम विभूषण' को स्वीकार करने के लिए उनकी पत्नी और अभिनेत्री हेमा मालिनी मंच पर आईं। इसके अलावा, संगीत जगत में अपनी जादुई उंगलियों से राग बिखेरने वाली प्रसिद्ध वायलिन वादक एन. राजम और अपनी सुरीली आवाज से दशकों तक दिलों पर राज करने वाली पार्श्व गायिका अलका याग्निक को भी इस प्रतिष्ठित मंच पर सम्मानित किया गया। दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मम्मूटी की उपस्थिति ने भी इस समारोह की भव्यता में चार चांद लगा दिए।

खेल जगत के सितारों ने भी इस अलंकरण समारोह में अपनी चमक बिखेरी। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर को वर्ष 2025 के विश्व कप में उनके ऐतिहासिक और विजयी नेतृत्व के लिए सम्मानित किया गया, वहीं भारतीय क्रिकेट के स्तंभ रोहित शर्मा और महिला हॉकी टीम की दीवार मानी जाने वाली स्टार गोलकीपर सविता पूनिया को भी राष्ट्रपति ने देश के इस प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान से नवाजा। इन खिलाड़ियों की सफलता की कहानी ने देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का एक नया अध्याय लिख दिया है।


इस भव्य समारोह के दौरान एक ऐसा दृश्य भी सामने आया जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं और भारतीय संस्कृति की जड़ों की गहराई का अहसास कराया। तमिलनाडु की 5,000 साल पुरानी पारंपरिक युद्ध कला 'सिलंबम' को जीवित रखने और इसके संरक्षण में अपना पूरा जीवन खपाने वाले मास्टर के. पजनीवेल को जब पद्म श्री से सम्मानित किया गया, तो उन्होंने मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष साष्टांग दंडवत प्रणाम किया। इस भावुक क्षण को देखकर प्रधानमंत्री ने आगे बढ़कर उन्हें गले लगा लिया, जो इस बात का प्रतीक था कि देश अपनी प्राचीन विरासत को सहेजने वाले जमीनी प्रहरियों के प्रति कितना कृतज्ञ है।

समारोह के समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित देश के शीर्ष नेतृत्व ने इन पुरस्कारों के बदलते स्वरूप की सराहना की। नेताओं ने रेखांकित किया कि कैसे पद्म पुरस्कार अब लुटियंस दिल्ली के संभ्रांत गलियारों से निकलकर देश के ग्रामीण इलाकों और जमीनी स्तर पर बदलाव लाने वाले वास्तविक नायकों तक पहुंच रहे हैं। सरकार की इस नीति ने पद्म पुरस्कारों को सही मायनों में 'पीपल्स पद्म' यानी जनता का पुरस्कार बना दिया है, जो न केवल इन जमीनी नायकों के संघर्षों को मान्यता देता है बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए सामूहिक रूप से आगे बढ़ने और देश सेवा करने की एक नई प्रेरणा जगाता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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