पंजाब विधानसभा में हंगामा; विपक्ष ने की सीएम भगवंत मान के डोप टेस्ट की मांग
विधानसभा सत्र के दौरान कांग्रेस और अकाली दल ने मुख्यमंत्री पर नशे में होने का आरोप लगाया, हालांकि स्पीकर ने विपक्ष की टेस्ट कराने की मांग खारिज कर दी।

पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान संबोधन देते मुख्यमंत्री भगवंत मान
Punjab Assembly Chaos CM Mann : पंजाब विधानसभा का विशेष मजदूर दिवस सत्र शुक्रवार को उस समय राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया, जब विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के विधायकों ने सदन की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री पर नशे की हालत में होने का सीधा आरोप लगाया, जिससे सदन में भारी अराजकता की स्थिति पैदा हो गई। विपक्ष ने अपने दावों को पुख्ता करने के लिए मुख्यमंत्री के भाषण की उन क्लिप्स का हवाला दिया जिनमें उनकी आवाज लड़खड़ाती हुई सुनाई दे रही थी और उनके हाव-भाव भी असामान्य नजर आ रहे थे।
हंगामे के बीच विपक्षी नेताओं ने विधानसभा के भीतर ही मुख्यमंत्री के अल्कोहल-मीटर और डोप टेस्ट कराने की मांग पर जोर दिया, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान ने विपक्ष की इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया और सदन की कार्यवाही जारी रखने का निर्देश दिया। अध्यक्ष के कड़े रुख के बीच ही विधानसभा ने न्यूनतम मजदूरी में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी और शिक्षा सुधारों जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों को पारित किया। जहां आम आदमी पार्टी ने इस सत्र को पूरी तरह श्रमिक कल्याण पर केंद्रित बताया, वहीं मुख्यमंत्री मान ने विपक्ष के आरोपों को निराधार और केवल बदनाम करने वाला दुष्प्रचार करार दिया।
Punjab Assembly Leader of the Opposition Partap Singh Bajwa demands a closed door alcohol test on all MLAs in Vidhan Sabha right now after allegations on Punjab Chief Minister Bhagwant Mann appearing drunk inside the house. Congress stages walkout from the Assembly. pic.twitter.com/c2JJ9K2QG2
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) May 1, 2026
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पर पहले भी इस तरह के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन विधानसभा के भीतर इस तरह की प्रत्यक्ष मांग ने राज्य की राजनीति में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। अंततः सदन में बिना किसी चिकित्सकीय परीक्षण के ही कार्यवाही संपन्न हुई, लेकिन इस घटनाक्रम ने लोकतांत्रिक मर्यादा और राजनीतिक शुचिता पर एक नई बहस छेड़ दी है। विधानसभा में पारित हुए जनहित के फैसलों से कहीं ज्यादा चर्चा अब मुख्यमंत्री पर लगे आरोपों और विपक्ष के आक्रामक रुख की हो रही है, जिसका गहरा प्रभाव आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति पर पड़ना तय है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
