अमृतसर में 6 जून 2026 को 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी तथा इसी दौरान मारे गए जरनैल सिंह भिंडरांवाले की पुण्यतिथि के अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब परिसर में सिख श्रद्धालुओं का विशाल जमावड़ा देखने को मिला। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए अरदास, कीर्तन और 1984 की घटनाओं में मारे गए लोगों की स्मृति में प्रार्थनाएँ कीं।

कार्यक्रम के दौरान कुछ संगठनों और श्रद्धालुओं द्वारा भिंडरांवाले के पोस्टर प्रदर्शित और वितरित किए गए, जिससे परिसर का माहौल भावनात्मक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन गया। इसी दौरान कुछ स्थानों पर खालिस्तान समर्थक नारे भी लगाए गए, जिनमें “खालिस्तान ज़िंदाबाद” जैसे नारे शामिल रहे। इस घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं, जहाँ कुछ आलोचकों ने इसे आतंकवाद के महिमामंडन के रूप में बताया, जबकि सिख संगठनों ने इसे 1984 की त्रासदी की स्मृति और भिंडरावाले को “शहीद” के रूप में सम्मान देने की भावना बताया।



रिपोर्टों के अनुसार, श्रद्धालुओं की यह भीड़ श्री अकाल तख्त साहिब और स्वर्ण मंदिर परिसर में एकत्र हुई, जहाँ पूरे आयोजन के दौरान पंजाब पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती रही। प्रशासन ने इस दिन को पहले से ही अत्यंत संवेदनशील मानते हुए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की थी, जिसमें पूरे परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सघन जांच और निगरानी शामिल थी।



ऑपरेशन ब्लू स्टार 1984 में 1 जून से 10 जून के बीच चलाया गया एक सैन्य अभियान था, जिसका चरम चरण 5–6 जून की रात को माना जाता है। इस अभियान का उद्देश्य स्वर्ण मंदिर परिसर में मौजूद हथियारबंद उग्रवादियों को बाहर निकालना था।

इस कार्रवाई का आदेश तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा दिया गया था। भारतीय सेना ने स्वर्ण मंदिर परिसर में प्रवेश कर भीषण गोलीबारी की, जिसके दौरान अकाल तख्त साहिब को गंभीर क्षति पहुँची। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस ऑपरेशन में 83 सैनिकों और लगभग 500 अन्य लोगों की मौत हुई, हालांकि सिख संगठनों द्वारा मृतकों की संख्या हजारों में बताई जाती है।

ऑपरेशन के दौरान प्रमुख धार्मिक-राजनीतिक व्यक्तित्व जरनैल सिंह भिंडरांवाले, जो दमदमी टकसाल से जुड़े एक प्रभावशाली धार्मिक प्रचारक थे, की मृत्यु 6 जून 1984 को स्वर्ण मंदिर परिसर में हुई। यही घटना आगे चलकर भारत के इतिहास के सबसे संवेदनशील अध्यायों में शामिल हो गई। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद देश में व्यापक राजनीतिक और सामाजिक परिणाम सामने आए, जिनमें 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके ही सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या और उसके बाद देश के कई हिस्सों में भड़के 1984 के दंगे शामिल हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय राजनीति और समाज पर गहरा प्रभाव डाला।

वर्ष 2026 के इस आयोजन में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच समग्र रूप से शांतिपूर्ण माहौल रहा, लेकिन कुछ स्थानों पर पोस्टरों और नारों के कारण माहौल भावनात्मक और राजनीतिक रूप से तनावपूर्ण बना रहा। यह आयोजन एक बार फिर इस ऐतिहासिक घटना की स्थायी संवेदनशीलता और उससे जुड़े अलग-अलग दृष्टिकोणों को सामने लाता है, जो दशकों बाद भी समाज और राजनीति में इसकी गहरी छाप को दर्शाता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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