अष्टलक्ष्मी को मिली नई उड़ान; जानें पूर्वोत्तर कैसे बन पाया विकास का मॉडल
केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि आधारभूत ढांचे में सुधार और डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार से पूर्वोत्तर के आठ राज्यों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।

केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण
Nirmala Sitharaman Northeast India Ashta Lakshmi statement : कभी भारत की मुख्यधारा के विकास से दूर और भौगोलिक अलगाव से जूझने वाला पूर्वोत्तर क्षेत्र आज वैश्विक मानचित्र पर समृद्धि और आधुनिकता का सबसे बड़ा चमकता हुआ सितारा बनकर उभरा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को एक बेहद महत्वपूर्ण बयान में इस बात की तस्दीक की कि पूर्वोत्तर भारत अब वैश्विक स्तर के कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण स्थलों का मुख्य केंद्र बन चुका है। उन्होंने साफ तौर पर रेखांकित किया कि 'अष्टलक्ष्मी' के नाम से विख्यात पूर्वोत्तर के आठ राज्यों ने न केवल अपनी एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय पहचान स्थापित की है, बल्कि यह पूरा क्षेत्र आज दुनिया के सामने सतत और समावेशी विकास का एक उत्कृष्ट और बेजोड़ उदाहरण पेश कर रहा है। सरकार के शीर्ष स्तर से आए इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का यह छोर अब केवल भौगोलिक हिस्सा नहीं, बल्कि वैश्विक तरक्की का एक नया पावरहाउस है।
इस अभूतपूर्व बदलाव की जमीनी हकीकत को बयां करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर देश और दुनिया के सामने पूर्वोत्तर की उन ऐतिहासिक उपलब्धियों का खाका रखा जो अब तक अकल्पनीय मानी जाती थीं। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा को समेटे हुए इस 'अष्टलक्ष्मी' क्षेत्र ने कई ऐसी वैश्विक कामयाबियां हासिल की हैं, जिन्होंने बड़े-बड़े विकसित देशों को भी पीछे छोड़ दिया है। दुनिया के सबसे पहले शत-प्रतिशत ऑर्गेनिक राज्य का गौरव हासिल करने वाले सिक्किम से लेकर दुनिया की सबसे लंबी दो-लेन सुरंग और सबसे ऊंचे गर्डर रेल पुल का निर्माण इसी धरती पर हुआ है। ये विशाल और आधुनिक बुनियादी ढांचे इस बात का सीधा प्रमाण हैं कि पूर्वोत्तर की तकनीकी और रणनीतिक क्षमता अब वैश्विक मानकों को चुनौती दे रही है।
इस विकास यात्रा को एक नया आयाम देते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस बदलाव को भारत के भविष्य का टर्निंग पॉइंट बताया। उन्होंने कहा कि जिन आठ राज्यों को अतीत की सरकारों में उपेक्षित और विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ मान लिया गया था, आज वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी नीतियों के चलते भारत की संपूर्ण विकास यात्रा के सबसे शक्तिशाली और नए ग्रोथ इंजन के रूप में तब्दील हो चुके हैं। यह पूरा क्षेत्र आज अपार आर्थिक संभावनाओं, असीमित ऊर्जा और नई शक्ति से सराबोर है। केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के ये बयान दर्शाते हैं कि पूर्वोत्तर को लेकर दिल्ली का नजरिया अब पूरी तरह बदल चुका है और इसे देश की प्रगति की अग्रिम पंक्ति में लाकर खड़ा कर दिया गया है।
सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक फैक्ट शीट के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 12 वर्षों में इस क्षेत्र के पूरे सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में एक युगांतरकारी और क्रांतिकारी परिवर्तन दर्ज किया गया है। यह ऐतिहासिक बदलाव लगातार मिले मजबूत नीतिगत समर्थन, रिकॉर्ड समय में बुनियादी ढांचे के अभूतपूर्व विस्तार और धरातल पर उतारे गए समावेशी विकास कार्यक्रमों के सीधे प्रभाव से संभव हो सका है। इस सरकारी दस्तावेज के अनुसार, सड़क, रेल, हवाई और सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल कनेक्टिविटी में किए गए क्रांतिकारी सुधारों ने पूर्वोत्तर की सदियों पुरानी भौगोलिक दूरी और मानसिक अलगाव को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है। कनेक्टिविटी के इस जाल ने न केवल क्षेत्रीय एकीकरण को मजबूत किया है, बल्कि सुदूर इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों की पहुंच को देश और दुनिया के बड़े आर्थिक अवसरों तक बेहद आसान बना दिया है।
इस बड़े बुनियादी ढांचे के विकास का सीधा और सकारात्मक असर आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन स्तर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। पिछले एक दशक से अधिक समय में स्वच्छ पेयजल, आधुनिक स्वच्छता, पक्के आवास, उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं और उच्च शिक्षा तक आम जनता की पहुंच में एक रिकॉर्ड सुधार दर्ज किया गया है, जिसने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के जीवन स्तर को पूरी तरह बदल दिया है। इसके साथ ही, यह क्षेत्र अब भारत की स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन यात्रा और भारत की महत्वाकांक्षी 'एक्ट ईस्ट' नीति का सबसे मजबूत और अहम स्तंभ बनकर सामने आया है। विशाल जलविद्युत परियोजनाओं, गैस पाइपलाइन के बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय सीमा-पार कनेक्टिविटी में किए गए भारी निवेश ने इस रणनीतिक बदलाव को और तेज कर दिया है, जिससे यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार का नया गेटवे बन गया है।
इस पूरी महा-योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वर्ष 2014 से लगातार मिल रहे विशेष नीतिगत सहयोग के तहत यहाँ के विकास को पर्यावरणीय संवेदनशीलता, संसाधनों के कुशल उपयोग और दीर्घकालिक स्थिरता के साथ बेहद खूबसूरती से संतुलित किया गया है। इसी दूरदर्शी दृष्टिकोण ने 'अष्टलक्ष्मी' को विकसित भारत के भीतर इको-फ्रेंडली और सतत विकास के एक ऐसे मॉडल के रूप में स्थापित कर दिया है, जिसका अध्ययन अब वैश्विक स्तर पर किया जा रहा है। आज का पूर्वोत्तर भारत अब वैश्विक जुड़ाव, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और असीमित आर्थिक अवसरों का एक नया और भव्य प्रवेश द्वार बन चुका है, जो पहले की तुलना में कहीं अधिक सशक्त, आपस में जुड़ा हुआ और भविष्य की हर वैश्विक चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
