Chandra Kumar Bose joins TMC : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की सरजमीं पर सियासी बिसात बिछ चुकी है, लेकिन मतदान के पहले चरण से ठीक पहले एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को हिला कर रख दिया है। महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र, चंद्र कुमार बोस ने आधिकारिक तौर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। नेताजी के भाई शरत चंद्र बोस के पौत्र रहे चंद्र कुमार बोस का यह फैसला न केवल एक दल से दूसरे दल में जाने की घटना है, बल्कि बंगाल की अस्मिता और नेताजी की विरासत पर दांव लगाने वाली एक बड़ी रणनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है।

चंद्र कुमार बोस का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 2016 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे थे। हालांकि, 2023 में उन्होंने बीजेपी से नाता तोड़ते हुए अपने पुराने जुड़ाव को एक 'ऐतिहासिक गलती' करार दिया था। टीएमसी में शामिल होते ही बोस ने बीजेपी पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने भगवा दल पर आरोप लगाया कि वह देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रही है और ब्रिटिश काल की 'बांटो और राज करो' की नीति का अनुसरण कर रही है। इसके विपरीत, उन्होंने ममता बनर्जी की समावेशी राजनीति की प्रशंसा की और भवानीपुर सीट से उनकी बड़ी जीत की भविष्यवाणी करते हुए बंगाल की संस्कृति की रक्षा के लिए टीएमसी को एकमात्र विकल्प बताया।


तृणमूल कांग्रेस ने इस दलबदल का गर्मजोशी से स्वागत किया है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इसे नेताजी की सेवा और 'बंगाल फर्स्ट' की विरासत का सम्मान बताया है। टीएमसी का मानना है कि बोस का साथ आना यह साबित करता है कि बंगाल की महान हस्तियों के वंशज भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में विश्वास रखते हैं। दूसरी ओर, विपक्षी खेमे में इस हलचल को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। बीजेपी के आलोचकों ने इस कदम को पूरी तरह से अवसरवादी करार दिया है। उनका कहना है कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज घटना और संदेशखाली जैसे गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए यह राजनीतिक पालाबदल किया गया है।

कानूनी और चुनावी औपचारिकताओं के बीच अब पश्चिम बंगाल की सभी 294 सीटों पर 23 अप्रैल से शुरू होने वाले दो चरणों के मतदान के लिए मंच तैयार है। चंद्र कुमार बोस का टीएमसी में शामिल होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आगामी चुनावों में 'नेताजी की विरासत' एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनने वाली है। यह देखना दिलचस्प होगा कि महान स्वतंत्रता सेनानी के परिवार से जुड़े इस चेहरे का प्रभाव मतदाताओं पर कितना पड़ता है और क्या यह कदम ममता बनर्जी की सत्ता में वापसी की राह को और आसान बना पाएगा।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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