नागपुर से अबू धाबी का सफर; NEET के इस अजीबोगरीब सेंटर पर क्यों भड़के राहुल गांधी?
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा नीट री-एग्जाम का सेंटर संयुक्त अरब अमीरात देने पर लोकसभा नेता प्रतिपक्ष ने परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही पर तीखे सवाल उठाए हैं।

नई दिल्ली में एक राजनैतिक कार्यक्रम के दौरान मंच से जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी, जिन्होंने नीट री-एग्जाम सेंटर आवंटन में एनटीए की प्रशासनिक चूक का विरोध किया।
NEET Re-Exam Nagpur student Abu Dhabi center : देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा 'नीट' (NEET) एक बार फिर विवादों के भंवर में फंस गई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की एक कथित और गंभीर प्रशासनिक चूक के कारण महाराष्ट्र के नागपुर का एक परीक्षार्थी मानसिक प्रताड़ना से गुजरने को मजबूर हो गया, जब उसे परीक्षा से ठीक एक दिन पहले पता चला कि उसका री-एग्जाम सेंटर भारत में नहीं बल्कि सात समंदर पार अबू धाबी में अलॉट कर दिया गया है। इस चौंकाने वाले वाकये ने न केवल पीड़ित परिवार को हताश कर दिया है, बल्कि देश की पूरी शिक्षा और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संवेदनशील और अचरज भरे मामले के सामने आते ही लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और परीक्षा नियामक संस्था के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे छात्रों के भविष्य के साथ क्रूर खिलवाड़ करार दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम की संवेदनशीलता को उजागर करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर छात्र की आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि नागपुर का यह परीक्षार्थी पिछले एक महीने से पूरी शिद्दत के साथ नीट री-एग्जाम की तैयारी में जुटा हुआ था। जब परीक्षा से महज एक दिन पहले उसने अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया, तो परीक्षा केंद्र के रूप में संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी 'अबू धाबी' का नाम देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। छात्र की बेबसी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसके पास न तो अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए पासपोर्ट उपलब्ध है और न ही उसके मध्यवर्गीय परिवार के पास इतनी अल्प सूचना पर विदेश भेजने के आर्थिक साधन हैं। राहुल गांधी के अनुसार, अचानक आए इस अप्रत्याशित संकट और तनाव के कारण वह छात्र पूरी रात रोता रहा और मानसिक रूप से टूटकर परीक्षा में शामिल न होने का फैसला करने की स्थिति में पहुंच गया।
इस प्रशासनिक विफलता पर तीखा प्रहार करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने एनटीए के कामकाज और उसकी जवाबदेही को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो सिस्टम देश के भीतर एक बच्चे को उसके अपने ही शहर में परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है, वह उसे बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे विदेश कैसे भेज सकता है। राहुल गांधी ने आक्रोश जताते हुए कहा कि एनटीए असल में चिकित्सा अभ्यर्थियों की योग्यता का नहीं, बल्कि देश के बच्चों और उनके लाचार माता-पिता के सब्र का इम्तिहान ले रही है। उन्होंने राजस्थान के कोटा में दिए अपने पुराने बयान को दोहराते हुए साफ शब्दों में कहा कि यह अब देश की गरिमामयी शिक्षा व्यवस्था नहीं रह गई है, बल्कि यह युवाओं की एक पूरी पीढ़ी के पैसे, बहुमूल्य समय और मानसिक शांति की जबरन वसूली का जरिया बन चुकी है।
इस बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद के गरमाते ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। मामले की गंभीरता और चौतरफा चौतरफा घिरने के बाद बैकफुट पर आई एनटीए ने सफाई देते हुए कहा है कि इस तकनीकी या प्रशासनिक शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेकर जरूरी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एजेंसी ने आश्वासन दिया है कि पूरे मामले की गहन पड़ताल और आवश्यक जांच-पड़ताल पूरी करने के बाद, आगामी कुछ ही घंटों के भीतर संबंधित कैंडिडेट को नागपुर शहर में ही एक नया परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिया जाएगा ताकि उसका साल खराब न हो।
नागपुर का एक बच्चा एक महीने से NEET re-exam की तैयारी कर रहा था।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) June 20, 2026
कल परीक्षा से ठीक एक दिन पहले उसने admit card डाउनलोड किया। उसका सेंटर निकला - अबू धाबी।
न पासपोर्ट, न परिवार के पास विदेश भेजने के पैसे, न अब कोई वक़्त बचा है। वो रातभर रोता रहा, और परीक्षा देने से ही मना कर रहा… https://t.co/TJOHUBnFDB
यह पूरा घटनाक्रम केवल एक छात्र की व्यक्तिगत परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की शीर्ष परीक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली में मौजूद गंभीर खामियों और तकनीकी लूपहोल्स को उजागर करता है। परीक्षा के अंतिम समय में पैदा होने वाला ऐसा अप्रत्याशित तनाव न केवल छात्रों के प्रदर्शन को प्रभावित करता है, बल्कि पूरी व्यवस्था के प्रति आम जनता के भरोसे को भी हिलाकर रख देता है। ऐसे में यह देखना बेहद अहम होगा कि भविष्य में देश के लाखों होनहार बच्चों को ऐसी मानसिक प्रताड़ना से बचाने के लिए सरकार और न्यायपालिका क्या ठोस और दंडात्मक कदम उठाती है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
