देश में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से मिटाने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कल से एक महत्वाकांक्षी 100 दिवसीय ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान शुरू करने जा रहा है। यह अभियान न सिर्फ सरकारी प्रयासों का विस्तार है, बल्कि समाज, संस्थाओं और समुदायों को इस लड़ाई का साझेदार बनाने की एक मजबूत पहल भी है। मंत्रालय ने स्पष्ट संदेश दिया है यह सिर्फ एक सरकारी प्रोग्राम नहीं, बल्कि राष्ट्रव्यापी सामाजिक आंदोलन है, जिसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है।

अभियान की योजना को तीन प्रमुख चरणों या स्पेल्स में बांटा गया है, जिनका उद्देश्य है कि बाल विवाह रोकथाम के प्रयास क्रमबद्ध, प्रभावी और देशव्यापी पैमाने पर संचालित हों। पहले चरण में जन-जागरूकता बढ़ाने और समुदायों को संवेदनशील बनाने पर जोर दिया जाएगा। मंत्रालय का मानना है कि बाल विवाह का मूल कारण सामाजिक मान्यताएँ और जागरूकता की कमी है, इसलिए अभियान की शुरुआत समाज की सोच में बदलाव लाने से ही की जा रही है।



दूसरे चरण में सरकारी तंत्र, स्थानीय संस्थाओं, पंचायतों, स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और बाल संरक्षण समितियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान मंत्रालय उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगा जहाँ बाल विवाह के मामले अधिक दर्ज होते हैं। संबंधित विभागों को बाल विवाह की रोकथाम, शिकायत दर्ज करने और हस्तक्षेप करने के लिए सशक्त और प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि किसी भी संभावित घटना को समय रहते रोका जा सके।

तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण, संकल्प और कार्रवाई अभियान को स्थायी और प्रभावी बनाने के लिए समर्पित होगा। इस चरण में समुदाय के प्रभावशाली नेताओं, धार्मिक गुरुओं, संस्थाओं और नागरिक समूहों को अपील की जाएगी कि वे बाल विवाह के विरुद्ध स्पष्ट संकल्प लें और इसे अपने क्षेत्रों में सख्ती से लागू कराएं। मंत्रालय का लक्ष्य है कि यह अभियान एक ऐसा जन-आंदोलन बने जिसमें बच्चे, अभिभावक, शिक्षण संस्थान, युवा समूह और स्थानीय संगठन सभी शामिल हों।

कानूनी रूप से, भारत में बाल विवाह प्रतिबंधित है और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA) के तहत सख्त दंड का प्रावधान है। अभियान के तहत इन कानूनी प्रावधानों की जानकारी घर–घर पहुँचाने पर जोर रहेगा, ताकि नागरिक न सिर्फ कानून को समझें, बल्कि उसका पालन कराने में भी सक्रिय भूमिका निभाएँ। यह प्रयास उन क्षेत्रों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जहाँ सामाजिक दबाव, परंपराएँ या आर्थिक परिस्थितियाँ बच्चों को समय से पहले विवाह के बंधन में धकेल देती हैं।

जैसे-जैसे देश बदल रहा है, सरकार का यह संदेश और भी स्पष्ट हो रहा है कि बाल विवाह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा है। 100 दिवसीय यह अभियान एक ऐसी राष्ट्रव्यापी पहल है जो लाखों बच्चों के जीवन को सुरक्षित, सशक्त और अवसरपूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। मंत्रालय का उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को एक ऐसे भारत का वादा देना है जहाँ हर बच्चा बिना किसी सामाजिक दबाव के अपने सपनों को आकार दे सके।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story