National Deworming Day 2026: बच्चों और किशोरों के लिए संजीवनी है यह सरकारी कार्यक्रम, पूरी जानकारी यहाँ देखें
भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस बच्चों और किशोरों को आंतों के कीड़े से बचाने की एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल है। यह कार्यक्रम साल में दो बार आयोजित होता है और देश के भविष्य को स्वस्थ बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाता है।

National Deworming Day 2026
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियाँ अक्सर खामोशी से जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। ऐसी ही एक गंभीर लेकिन कम दिखाई देने वाली समस्या है बच्चों और किशोरों में आंतों के कीड़े (Intestinal Worm Infections)। इसी चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार ने एक व्यापक और सुनियोजित अभियान की शुरुआत की — राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (National Deworming Day)।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस भारत सरकार का एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य बच्चों और किशोरों को आंतों में होने वाले कृमि संक्रमण से मुक्त करना है। यह कार्यक्रम वर्ष में दो बार — 10 फरवरी और 10 अगस्त को देशभर में आयोजित किया जाता है। जो बच्चे किसी कारणवश मुख्य तिथि पर दवा नहीं ले पाते, उनके लिए कुछ दिनों बाद मॉप-अप डे भी रखा जाता है, ताकि कोई भी पात्र बच्चा इस स्वास्थ्य सुरक्षा कवच से वंचित न रहे।
कृमि मुक्ति क्यों आवश्यक है?
कृमि संक्रमण बच्चों के स्वास्थ्य और विकास पर गंभीर प्रभाव डालता है। इसके प्रमुख दुष्परिणाम हैं:
- एनीमिया (खून की कमी)
- कुपोषण
- शारीरिक विकास में बाधा
- एकाग्रता व सीखने की क्षमता में कमी
- कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता
नियमित कृमि मुक्ति से बच्चों के पोषण स्तर में सुधार, स्कूल में उपस्थिति में वृद्धि और समग्र शारीरिक व मानसिक विकास सुनिश्चित होता है।
इस कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी। इसे केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health & Family Welfare) द्वारा लॉन्च किया गया। इसके पीछे मुख्य कारण यह था कि स्वास्थ्य सर्वेक्षणों और अध्ययनों में यह सामने आया कि भारत में बच्चों के बीच मिट्टी से फैलने वाले कृमि संक्रमण (Soil-Transmitted Helminths) का बोझ दुनिया में सबसे अधिक है।
ये संक्रमण न केवल बच्चों के शारीरिक विकास को प्रभावित करते हैं, बल्कि उनकी सीखने की क्षमता, पोषण स्तर और रोग प्रतिरोधक शक्ति को भी कमजोर कर देते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिशों के अनुरूप भारत ने इस समस्या को रोकने के लिए सामूहिक और निवारक रणनीति अपनाई। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का लक्ष्य 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों और किशोरों को कवर करना है।
इसमें शामिल हैं:
- 1–5 वर्ष के प्री-स्कूल बच्चे
- 6–14 वर्ष के स्कूल जाने वाले बच्चे
- 15–19 वर्ष के किशोर, जिनमें स्कूल से बाहर रहने वाले युवा भी शामिल हैं
इस दिन बच्चों को एल्बेंडाजोल (Albendazole) की एक खुराक निःशुल्क दी जाती है। यह दवा आंगनवाड़ी केंद्रों, सरकारी एवं निजी स्कूलों और सामुदायिक स्वास्थ्य अभियानों के माध्यम से वितरित की जाती है। विशेष रूप से उन बच्चों तक पहुँचने पर ध्यान दिया जाता है जो स्कूल नहीं जाते, ताकि स्वास्थ्य सेवा की पहुँच समान रूप से सुनिश्चित हो सके।
कार्यक्रम का क्रियान्वयन कौन करता है?
मुख्य क्रियान्वयन एजेंसी:
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार
सहयोगी संस्थाएँ:
- शिक्षा मंत्रालय
- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
- राज्य सरकारें
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)
- यूनिसेफ (UNICEF) — तकनीकी सहयोग
भारत में स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल की सीमित उपलब्धता के कारण कृमि संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है। ऐसे में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, सशक्त और कृमि-मुक्त बचपन की दिशा में भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
