भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल दुनिया में एक ऐतिहासिक मोड़ तब आया जब राज्यसभा ने ‘नेशनल क्रिएटर इकोनॉमी बिल 2026’ को पारित कर दिया। यह कदम देश के लाखों सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स और डिजिटल कलाकारों के लिए एक नई पहचान और दिशा तय करता है। अब तक अनौपचारिक रूप से काम कर रहे इस क्षेत्र को पहली बार एक संरचित कानूनी ढांचे के तहत लाने की पहल की गई है, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक बड़े बदलाव का संकेत है।

इस विधेयक के पारित होने के साथ ही कंटेंट क्रिएटर्स को औपचारिक रूप से अर्थव्यवस्था का हिस्सा माना जाएगा। इसका मतलब है कि अब उनका काम केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें एक पेशेवर श्रेणी के रूप में मान्यता मिलेगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत में यूट्यूब, इंस्टाग्राम और गेमिंग जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए क्रिएटर इकोनॉमी तेजी से विस्तार कर रही है और यह ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ के तहत सरकार की व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा बन चुकी है।



विधेयक के तहत डिजिटल क्रिएटर्स को एक व्यवस्थित कानूनी ढांचे में लाने का प्रस्ताव है, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुपालन से जुड़े नियम शामिल हो सकते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रकाशित होने वाला कंटेंट जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए और दर्शकों के हितों की रक्षा हो। विशेष रूप से पेड प्रमोशन, एआई-जनित सामग्री और भ्रामक जानकारी को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश लागू किए जाने की संभावना है।

इसके साथ ही, इस बिल में क्रिएटर्स के लिए पंजीकरण और संभावित सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक केंद्रीकृत रजिस्ट्रेशन प्रणाली विकसित की जा सकती है, जिसके माध्यम से क्रिएटर्स को औपचारिक रूप से पंजीकृत किया जाएगा। इसके जरिए उन्हें बीमा, पेंशन या अन्य कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच मिलने की संभावना जताई जा रही है, जिससे इस क्षेत्र में कार्यरत लोगों को आर्थिक और कानूनी सुरक्षा मिल सके।

यह विधेयक केवल नियमन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य इस तेजी से विकसित हो रहे उद्योग को व्यवस्थित और संगठित बनाना भी है। अब तक बिखरे हुए इस क्षेत्र को एकीकृत ढांचे में लाकर सरकार पारदर्शिता और स्थिरता सुनिश्चित करना चाहती है, जिससे क्रिएटर्स, ब्रांड्स और प्लेटफॉर्म्स के बीच संबंध अधिक स्पष्ट और संतुलित हो सकें।

इस बिल के तहत क्रिएटर्स की भूमिका भी स्पष्ट रूप से परिभाषित की गई है। अब उन्हें केवल ‘इन्फ्लुएंसर’ के रूप में नहीं, बल्कि औपचारिक आर्थिक योगदानकर्ता के रूप में देखा जाएगा। उन्हें एक पंजीकृत पेशेवर के तौर पर मान्यता मिल सकती है, जैसा कि फ्रीलांसर या एमएसएमई को मिलता है। साथ ही, उनसे अपेक्षा की जाएगी कि वे जिम्मेदार कंटेंट प्रकाशक के रूप में काम करें, जिसमें पेड प्रमोशन और एआई-आधारित सामग्री का खुलासा करना अनिवार्य हो सकता है।

इसके अलावा, क्रिएटर्स की आय चाहे वह विज्ञापन, ब्रांड डील्स या सब्सक्रिप्शन के माध्यम से हो अब एक व्यवस्थित और कर योग्य ढांचे के अंतर्गत आ सकती है। इससे न केवल राजस्व पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि इस क्षेत्र को एक औपचारिक आर्थिक इकाई के रूप में मजबूती भी मिलेगी। साथ ही, भविष्य में क्रिएटर्स को नीति निर्माण प्रक्रियाओं, यूनियनों या सलाहकार समितियों में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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