तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले के कूटेरीपट्टू इलाके में इतिहास फिर ज़िंदा हो उठा है। यहां खुदाई के दौरान करीब 1000 साल पुरानी चोल काल की पत्थर की कलाकृतियां मिली हैं, जिन्होंने एक बार फिर इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को सुर्खियों में ला दिया है। स्थानीय इतिहासकार सेनगुट्टुवन द्वारा किए गए सर्वेक्षण में मिली ये मूर्तियां न सिर्फ कलात्मक दृष्टि से अद्भुत हैं, बल्कि दक्षिण भारत के मध्यकालीन धार्मिक सह-अस्तित्व की अनूठी झलक भी पेश करती हैं।

अलाग्रामम गांव के पास मिली इन मूर्तियों में वैष्णवी देवी, कौमारी और एक बौद्ध आकृति की नक्काशियां शामिल हैं। इनमें वैष्णवी देवी की मूर्ति विशेष ध्यान आकर्षित कर रही है, जो आधी ज़मीन में दबी हुई अवस्था में मिली। मूर्ति की चार भुजाओं, सूक्ष्म नक्काशी और शांत मुखाभिव्यक्ति से उस दौर की कलात्मक उत्कृष्टता झलकती है। वहीं, चेल्लियाम्मन मंदिर परिसर में मिली कौमारी की मूर्ति भी दुर्लभ मानी जा रही है।

इतना ही नहीं, जैन मंदिर मार्ग के पास खुदाई में करुणा के प्रतीक बोधिसत्व अवलोकितेश्वर की बौद्ध मूर्ति मिली है, जो पांच सिर वाले सर्प के नीचे स्थापित है। यह खोज इस बात की पुष्टि करती है कि चोल शासनकाल में इस क्षेत्र में बौद्ध, जैन और हिन्दू परंपराएं एक साथ फली-फूली थीं। पुरातत्वविदों का मानना है कि ये सभी मूर्तियां कभी एक प्राचीन शिव मंदिर परिसर का हिस्सा रही होंगी।

इतिहासकार सेनगुट्टुवन ने इस खोज को “दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता और कलात्मक गौरव का जीवंत प्रमाण” बताया है। उन्होंने एएसआई और स्थानीय प्रशासन से इन दुर्लभ मूर्तियों के संरक्षण और विस्तृत दस्तावेजीकरण की अपील की है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस प्राचीन धरोहर से जुड़ सकें।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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