26 जनवरी 2026 को जब देशभर में गणतंत्र दिवस का उत्सव मनाया जा रहा था, उसी दिन उत्तराखंड के कोटद्वार में घटी एक घटना ने माहौल को अचानक तनावपूर्ण बना दिया। स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ एक विवाद देखते ही देखते राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया। इस घटनाक्रम के केंद्र में थे 70 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद और 42 वर्षीय जिम संचालक दीपक कुमार।

बताया गया कि एक समूह, जिसे कथित रूप से बजरंग दल से जुड़ा बताया गया, ने वकील अहमद की दुकान के नाम में शामिल “बाबा” शब्द पर आपत्ति जताई। दुकानदार कई दशकों से अपनी दुकान के नाम में इस शब्द का उपयोग करते आ रहे थे। विवाद के दौरान कथित रूप से उन पर नाम बदलने का दबाव बनाया गया, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।


इसी दौरान घटनास्थल पर पहुंचे जिम संचालक दीपक कुमार ने हस्तक्षेप करते हुए बुजुर्ग दुकानदार का समर्थन किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब उनसे उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया—“मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।” यह कथन कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जाने लगा। कई लोगों ने इसे सांप्रदायिक सौहार्द और एकता के संदेश के रूप में देखा, जबकि कुछ समूहों ने इसका विरोध किया।


घटना के बाद हालात और गंभीर हो गए। कुछ दक्षिणपंथी संगठनों और व्यक्तियों द्वारा दीपक कुमार को निशाना बनाया गया। उनके घर और जिम के बाहर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। उन्हें कथित रूप से जान से मारने की धमकियां भी मिलीं। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब बिहार के एक व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में दीपक की हत्या के लिए लगभग दो लाख रुपये के इनाम की घोषणा की गई। शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित व्यक्ति को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने इसे गंभीर आपराधिक धमकी मानते हुए जांच शुरू की।


कानूनी कार्रवाई और दर्ज एफआईआर:

राज्य पुलिस ने पूरे घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए कई प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की हैं। इनमें शामिल हैं:

  • दुकानदार के साथ कथित दुर्व्यवहार से जुड़े आरोप
  • सार्वजनिक शांति भंग करने के मामले
  • जान से मारने की धमकी और उकसावे से संबंधित शिकायतें

पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और कानून के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी।


जिम व्यवसाय पर असर:

इस विवाद का सीधा असर दीपक कुमार के व्यवसाय पर भी पड़ा है। कोटद्वार स्थित उनका “हुल्क जिम” इस घटनाक्रम के बाद आर्थिक संकट से जूझ रहा है। जहां पहले जिम में लगभग 150 सदस्य थे, वहीं अब सदस्य संख्या घटकर 20 से भी कम रह गई है। स्थानीय व्यापारिक हलकों में इसे सामाजिक तनाव का प्रत्यक्ष प्रभाव माना जा रहा है।


घटना के बाद समर्थन की आवाजें भी सामने आईं। देश की सर्वोच्च अदालत से जुड़े लगभग 15 वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दीपक कुमार को कानूनी सहायता और आर्थिक सहयोग देने की घोषणा की। उन्होंने न केवल उनके पक्ष में कानूनी प्रतिनिधित्व की पेशकश की, बल्कि वार्षिक जिम सदस्यता लेकर उनके व्यवसाय को समर्थन देने का भी निर्णय लिया। कोटद्वार की यह घटना अब केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रही। इसने कानून-व्यवस्था, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक सौहार्द जैसे व्यापक मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है।


गणतंत्र दिवस जैसे प्रतीकात्मक दिन पर घटी इस घटना ने समाज में मौजूद संवेदनशीलताओं को उजागर किया है। एक ओर विरोध, धमकियां और कानूनी कार्रवाइयां हैं, तो दूसरी ओर समर्थन और एकजुटता की पहलें भी सामने आई हैं। यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि स्थानीय स्तर की घटनाएं भी व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय प्रभाव डाल सकती हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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