मिसिंग लिंक ट्रस्ट (MLT) ने Capgemini India के साथ मिलकर बच्चों की सुरक्षा के लिए एआई-इनेबल्ड, व्हाट्सऐप-बेस्ड चैटबॉट ‘खुली बात’ लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य माता-पिता, शिक्षकों और बच्चों की देखभाल करने वालों को बाल सुरक्षा से जुड़ी भरोसेमंद जानकारी, मार्गदर्शन और जरूरी संसाधनों तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है।

मुंबई, सितंबर 2026: बच्चों की सुरक्षा के लिए समय रहते सही बातचीत और जानकारी जरूरी है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की “क्राइम इन इंडिया 2024” रिपोर्ट के अनुसार, भारत में “प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज (पोक्सो) एक्ट” के तहत 69,191 मामले दर्ज किए गए। इनमें 96 प्रतिशत से अधिक मामलों में आरोपी कोई अजनबी नहीं, बल्कि करीबी लोग ही थे।

बाल शोषण की रोकथाम के लिए बच्चों को रिश्तों की सीमा, सहमति और हेल्दी रिलेशन को समझने के साथ असहज करने वाली स्थितियों या गतिविधियों की पहचान करना आना जरूरी है। उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर कब और कैसे मदद लेनी है। इसके साथ माता-पिता, शिक्षकों और बच्चों की देखभाल करने वालों के पास भी बच्चों की बात सुनने, उसका जवाब देने और उनका साथ देने के लिए पर्याप्त जानकारी होना आवश्यक है।

मिसिंग लिंक ट्रस्ट ने इसी ‘रोकथाम-पहले’ के नजरिए को आगे बढ़ाते हुए Capgemini India के साथ मिलकर ‘खुली बात’ लॉन्च किया है। यह बच्चों की सुरक्षा के लिए विकसित एआई-इनेबल्ड, व्हाट्सऐप-बेस्ड चैटबॉट है।

‘खुली बात’ यानी खुलकर बातचीत करने की पहल को माता-पिता और बच्चों की देखभाल करने वालों तक बाल सुरक्षा से जुड़ी भरोसेमंद जानकारी और मार्गदर्शन पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। यह उन्हें अपनी देखरेख में रहने वाले बच्चों के साथ सीमाओं, सहमति, रिश्तों, ऑनलाइन सुरक्षा, दुर्व्यवहार और शोषण जैसे विषयों पर बातचीत करने में मदद करता है। जरूरत पड़ने पर यह उन्हें सही मदद और संसाधनों तक भी पहुंचाता है। कोई भी गार्डियन व्हाट्सऐप चैटबॉट के नंबर 6003060040 पर ‘Hi’ संदेश भेजकर बातचीत शुरू कर सकता है।

महाराष्ट्र सरकार के सूचना और जनसंपर्क विभाग के प्रधान सचिव, आईपीएस श्री बृजेश सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने इस चैटबॉट को लॉन्च किया। MLT मुंबई के 100 बीएमसी स्कूलों में ‘रोकथाम-पहले’ जैसे इनिशिएटिव पर काम करता है।

यह साझेदारी तीन क्षेत्रों में हुई है। इसके तहत स्कूल-आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से 10,000 किशोरों को सुरक्षा संबंधी शिक्षा दी जाएगी। इसके अलावा माता-पिता, शिक्षकों और देखभाल करने वालों के लिए एआई-इनेबल्ड सुरक्षा चैटबॉट ‘खुली बात’ विकसित किया गया है। तीसरे क्षेत्र में विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के माध्यम से बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में सिस्टम की प्रतिक्रिया को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है।

मिसिंग लिंक ट्रस्ट की फाउंडर ट्रस्टी और सीईओ लीना केजरीवाल ने कहा, “खुली बात एआई मॉडल से मिलने वाली कोई आम सलाह नहीं है। यह हमारे दस साल से अधिक समय तक किए गए जमीनी काम पर आधारित है। इसमें जोखिम के सही और स्थानीय पैटर्न को ध्यान में रखा गया है और यह भारतीय परिवारों की असल जिंदगी की स्थितियों के प्रति संवेदनशील है।”

उन्होंने कहा, “हर जवाब एक सोच-समझकर तैयार किए गए नॉलेज बेस से आता है, जिसे पूर्वाग्रह, जेंडर और पावर डायनामिक्स (सत्ता समीकरण) को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसे ऐसे डिजाइन किया गया है कि अलग-अलग स्तर की डिजिटल पहुंच और जानकारी रखने वाले वयस्क भी इसका इस्तेमाल कर सकें। यह सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं है। यह परिवारों को वास्तविक, स्थानीय सपोर्ट और रिपोर्टिंग के तरीकों से जोड़ता है। इसलिए इसका मकसद सिर्फ वयस्कों को जानकारी देना नहीं है, बल्कि उन्हें यह समझने में मदद करना है कि वे क्या देख रहे हैं और उसके हिसाब से सही कदम उठा सकें।”

कैपजेमिनी के वाइस प्रेसिडेंट और सीएसआर हेड - इंडिया, कुमार अनुराग प्रताप ने कहा, “आज बच्चे ऑनलाइन ज्यादा समय बिता रहे हैं। टेक्नोलॉजी अपने साथ नए अवसर और नए जोखिम, दोनों ला रही है, जिससे बचाव और शुरुआती स्तर पर ही कदम उठाना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। ‘खुली बात’ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके माता-पिता और बच्चों की देखभाल करने वालों तक बच्चों की सुरक्षा से जुड़े भरोसेमंद संसाधन आसानी से पहुंचाती है, और इसके लिए ऐसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है जिनका वे पहले से ही इस्तेमाल कर रहे हैं।”

यह नई पहल मिसिंग लिंक ट्रस्ट के ‘मिसिंग अवेयरनेस एंड स्कूल सेफ्टी प्रोग्राम’ (MASSp) के तहत किए जा रहे व्यापक रोकथाम कार्यों को आगे बढ़ाती है। यह प्रोग्राम गार्डियन को बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा, ऑनलाइन सुरक्षा, सीमाओं, ग्रूमिंग, अपनी बात रखने और मदद मांगने से जुड़ी जानकारी और कौशल से लैस करता है।

‘खुली बात’ के माध्यम से MLT का उद्देश्य बाल सुरक्षा के इकोसिस्टम को मजबूत करना है। इसके साथ सुरक्षा शिक्षा, खुलकर बातचीत करने और शुरुआती स्तर पर मदद मांगने की आदत को बचपन का एक आम हिस्सा बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

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