मिजोरम की वादियों में जब से रेल की सीटी गूंजी है, राज्य के सामाजिक और प्रशासनिक ढांचे में एक अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बैराबी-सैरांग रेल लाइन के ऐतिहासिक उद्घाटन के बाद, मिजोरम में बाहरी आगंतुकों की संख्या ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, महज चार महीनों के भीतर सैरांग रेलवे स्टेशन पर स्थापित सरकारी काउंटर से 22,500 से अधिक इनर लाइन परमिट (ILP) जारी किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा न केवल मिजोरम के पर्यटन और व्यापारिक आकर्षण को दर्शाता है, बल्कि सीमावर्ती राज्य की जनसांख्यिकीय सुरक्षा और प्रशासनिक क्षमता पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।

घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए मिजोरम गृह विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 13 सितंबर 2025 को रेल सेवा शुरू होने के बाद से 8 जनवरी 2026 तक पर्यटकों, व्यापारियों और प्रवासी श्रमिकों का सैलाब उमड़ पड़ा है। आइजोल को नई दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी जैसे महानगरों से जोड़ने वाली राजधानी एक्सप्रेस और अन्य यात्री ट्रेनों के आगमन के साथ ही सैरांग स्टेशन पर प्रतिदिन औसतन 400 नए परमिट जारी किए जा रहे हैं। आगंतुकों की सबसे बड़ी संख्या पड़ोसी राज्य असम और पश्चिम बंगाल से है, हालांकि दिल्ली और दक्षिण भारत से आने वाले पेशेवरों की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बढ़ती भीड़ ने सैरांग रेलवे स्टेशन को राज्य में प्रवेश का सबसे व्यस्त केंद्र बना दिया है।

कानूनी परिप्रेक्ष्य में देखें तो इनर लाइन परमिट (ILP) बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के तहत संचालित एक अनिवार्य सुरक्षा कवच है। 1875 में ब्रिटिश काल के दौरान अधिसूचित यह व्यवस्था वर्तमान में मिजोरम सहित पूर्वोत्तर के चार राज्यों में लागू है, जिसका मूल उद्देश्य स्थानीय जनजातीय समुदायों की विशिष्ट पहचान, संस्कृति और भूमि अधिकारों की रक्षा करना है। वर्तमान में यह प्रणाली केवल भारतीय नागरिकों को एक निश्चित अवधि और विशेष उद्देश्य के लिए राज्य में प्रवेश की अनुमति देती है। हालांकि, सैरांग में कर्मचारियों और रेलवे पुलिस (GRP) की भारी कमी के कारण परमिट के सत्यापन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

मिजोरम के लिए यह रेल कनेक्टिविटी विकास के नए द्वार तो खोल रही है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में बाहरी लोगों का प्रवेश स्थानीय संगठनों के बीच पहचान के संकट की चिंता भी बढ़ा रहा है। सैरांग स्टेशन पर आईएलपी काउंटर की व्यस्तता इस बात का संकेत है कि पूर्वोत्तर का यह शांत प्रदेश अब राष्ट्रीय मुख्यधारा से पूरी तरह जुड़ चुका है। अब चुनौती इस बात की है कि सरकार विकास की इस तीव्र गति और स्थानीय संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाए रखती है। आने वाले समय में आईएलपी प्रणाली का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना ही राज्य की शांति और सुरक्षा का मुख्य आधार होगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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