अयोध्या के अशरफपुर टोनिया गांव के किसान ओम प्रकाश सिंह ने जापान की दुर्लभ और दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिने जाने वाले मियाज़ाकी आम की सफल खेती कर नई मिसाल कायम की है। 8–10 फलों से लदे इस पेड़ की चर्चा देशभर में हो रही है। मियाज़ाकी आम की कीमत भारत में 1.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई जाती है।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने कृषि और बागवानी क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ-साथ किसानों का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। अयोध्या के अशरफपुर टोनिया गांव के एक किसान ने अपने घर के बगीचे में जापान की दुर्लभ और बेहद महंगी मानी जाने वाली मियाज़ाकी आम की किस्म को सफलतापूर्वक उगाकर एक नई मिसाल कायम की है। दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिने जाने वाले इस विशेष फल की खेती को लेकर अब क्षेत्र में उत्सुकता और चर्चा का माहौल है।

इस उपलब्धि को हासिल करने वाले किसान ओम प्रकाश सिंह हैं, जिन्होंने अपने घरेलू बाग में मियाज़ाकी आम का पौधा तैयार किया और उसे फल देने की स्थिति तक पहुंचाया। वर्तमान में उनके पेड़ पर 8 से 10 आम लगे हुए हैं। ओम प्रकाश सिंह का कहना है कि जैसे-जैसे पेड़ परिपक्व होगा, अगले दो से तीन वर्षों में उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। उनकी इस सफलता को देशभर के बागवानी प्रेमी और किसान विशेष रुचि के साथ देख रहे हैं।

मियाज़ाकी आम अपनी अनोखी विशेषताओं के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। सामान्य आमों के विपरीत, जो पकने पर पीले या हरे रंग के दिखाई देते हैं, मियाज़ाकी आम पूरी तरह पकने के बाद गहरे लाल-बैंगनी रंग का हो जाता है। इसका आकर्षक रंग और शानदार स्वरूप इसे अन्य किस्मों से अलग पहचान दिलाता है। इसके अलावा यह आम अत्यधिक मिठास, समृद्ध पोषण तत्वों और बड़े आकार के लिए भी जाना जाता है। एक मियाज़ाकी आम का वजन आमतौर पर 250 से 350 ग्राम के बीच होता है। जापान में इसे एक प्रीमियम लक्जरी फल माना जाता है और अक्सर इसे विशेष उपहार के रूप में भेंट किया जाता है।

मियाज़ाकी आम को दुनिया के सबसे महंगे आमों में शामिल किए जाने के पीछे इसकी असाधारण बाजार कीमत भी एक बड़ा कारण है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार जापान में इस आम की कीमत 2.7 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है। वहीं भारत में भी इसकी कीमत लगभग 1.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम बताई जाती है। चूंकि एक किलोग्राम में सामान्यतः केवल 4 से 6 आम ही आते हैं, इसलिए एक-एक फल की कीमत हजारों रुपये तक हो सकती है। इस दुर्लभ आम की उत्पत्ति जापान के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित मियाज़ाकी प्रीफेक्चर से हुई है। यह इलाका अपने अनुकूल मौसम और उन्नत कृषि तकनीकों के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। जापान में इस आम को "एग ऑफ द सन" नाम से भी बाजार में पेश किया जाता है, जो इसकी उत्कृष्ट गुणवत्ता, चमकदार रंग और प्रीमियम पहचान को दर्शाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत में मियाज़ाकी आम की सफल खेती आसान नहीं मानी जाती। इसके लिए तापमान और जलवायु का विशेष प्रबंधन, उचित सिंचाई व्यवस्था, कीट एवं रोगों से सुरक्षा तथा उन्नत बागवानी तकनीकों की आवश्यकता होती है। ऐसे में अयोध्या के किसान ओम प्रकाश सिंह द्वारा इस किस्म को सफलतापूर्वक उगाना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह सफलता भारतीय किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है। यदि उचित तकनीक और प्रबंधन के साथ इस प्रकार की उच्च मूल्य वाली विदेशी फलों की किस्मों का उत्पादन देश में बढ़ता है, तो किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और आयात पर निर्भरता भी कम हो सकती है।

अयोध्या के एक किसान की यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी है, बल्कि यह भारत में प्रीमियम और दुर्लभ फल किस्मों की खेती की बढ़ती संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरी है। मियाज़ाकी आम की सफल खेती ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक कृषि तकनीकों और नवाचार के माध्यम से भारतीय किसान वैश्विक स्तर की फसलों का उत्पादन करने में सक्षम हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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