लखनऊ: उत्तर प्रदेश की हृदयस्थली से एक ऐसी विकास गाथा उभर रही है जो आने वाले दशकों में राज्य की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को बदलने का माद्दा रखती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने पिछड़ा वर्ग कल्याण को केवल कागजी योजनाओं तक सीमित न रखकर, उसे 'शिक्षा, सुरक्षा और स्वावलंबन' के त्रिसूत्रीय मॉडल पर धरातल पर उतार दिया है। वर्ष 2025-26 के आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश अब समावेशी विकास के उस पथ पर अग्रसर है, जहाँ समाज के अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी तकनीक और आधुनिक शिक्षा से लैस होकर मुख्यधारा का हिस्सा बन रहा है।

इस महाभियान की कमान संभाल रहे पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने स्पष्ट किया कि "विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश" का स्वप्न तभी साकार होगा जब प्रदेश का युवा हुनरमंद होगा। इसी विजन को गति देते हुए पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का बजट वर्ष 2016-17 के 1,295 करोड़ रुपये से ढाई गुना बढ़ाकर वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3,124.45 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह भारी-भरकम निवेश सीधे तौर पर छात्रों की मेधा और युवाओं के कौशल पर खर्च किया जा रहा है।

शिक्षा के क्षेत्र में हुए क्रांतिकारी बदलावों की बात करें तो चालू वित्तीय वर्ष में ही पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के तहत 6,90,349 छात्रों को 147.75 करोड़ रुपये और दशमोत्तर छात्रवृत्ति के माध्यम से 5,85,954 छात्रों को 175.54 करोड़ रुपये की सीधी वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। कुल मिलाकर केवल 2025 में ही 12.76 लाख से अधिक विद्यार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से 323.29 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद लोक भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में इस पारदर्शी प्रक्रिया की निगरानी की, ताकि भ्रष्टाचार की रत्ती भर भी गुंजाइश न रहे।

कौशल विकास के मोर्चे पर, युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने हेतु ओ-लेवल (O-Level) और सीसीसी (CCC) कंप्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रमों को नई ऊंचाइयों पर ले जाया गया है। 23 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, 22,392 युवाओं को डिजिटल कौशल से लैस किया जा चुका है, जिसमें 18,159 छात्र और 4,233 छात्राएं शामिल हैं। इसके साथ ही, कौशल विकास मिशन के राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल के मार्गदर्शन में तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप ढाला जा रहा है।

सामाजिक सुरक्षा के स्तंभ को मजबूती देते हुए 'शादी अनुदान योजना' के तहत 72,296 बेटियों के विवाह हेतु 144.59 करोड़ रुपये का अनुदान वितरित किया गया है। यह योजना न केवल आर्थिक सहायता है, बल्कि वंचित परिवारों की गरिमा का प्रतीक भी बन चुकी है। मिशन निदेशक पुलकित खरे और अपर मिशन निदेशक प्रिया सिंह के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला इन योजनाओं को गांव-गांव तक पहुँचाने में जुटा है। उत्तर प्रदेश की यह पहल न केवल शिक्षा और रोजगार के अंतर को पाट रही है, बल्कि राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की ओर मजबूती से धकेल रही है।

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