Massive fire in Lucknow slum : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के टेढ़ी पुलिया इलाके में बुधवार की शाम उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब एक भीषण आग ने देखते ही देखते सैकड़ों परिवारों के आशियानों को अपनी चपेट में ले लिया। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की जमीन पर बनी इस अनधिकृत झुग्गी बस्ती में करीब साढ़े पांच बजे लगी आग ने ऐसा रौद्र रूप धारण किया कि देखते ही देखते 200 से अधिक झोपड़ियां जलकर राख के ढेर में तब्दील हो गईं। इस बस्ती में मुख्य रूप से असम से आए प्रवासी कचरा बीनने वाले मजदूर रहते थे, जो अब अपनी मेहनत की कमाई और सिर की छत गंवाकर पूरी तरह से सड़क पर आ गए हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद तेज हवाओं ने लपटों को और अधिक भड़का दिया, जिससे बचाव कार्य में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बस्ती में रखे गैस सिलेंडरों में हुए सिलसिलेवार विस्फोटों ने आग की तीव्रता को इतना बढ़ा दिया कि आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही दमकल की 20 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और देर रात तक आग पर काबू पाने की जद्दोजहद चलती रही। गनीमत यह रही कि इस बड़े हादसे में अब तक किसी जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि आग की चपेट में आने और अफरा-तफरी के कारण दर्जनों लोग झुलसकर घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने तत्काल संज्ञान लेते हुए राहत कार्यों की कमान संभाली। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि विस्थापित परिवारों के लिए तत्काल अस्थायी आश्रय और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। राहत शिविरों में मेडिकल कैंप भी लगाए गए हैं ताकि घायलों का उपचार किया जा सके। वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए सरकार से मांग की है कि बेघर हुए गरीबों को केवल भोजन और पानी ही नहीं, बल्कि स्थायी आवास और उचित आर्थिक मुआवजा भी दिया जाए। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई है।

प्रशासनिक स्तर पर प्रारंभिक जांच में आग का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, लेकिन इतनी बड़ी आबादी वाली बस्ती में सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अनधिकृत बस्तियों में बिजली के खुले तारों का जाल और दमकल वाहनों के पहुंचने के लिए संकरे रास्ते अक्सर ऐसी त्रासदी का कारण बनते हैं। यह भीषण अग्निकांड न केवल सैकड़ों जिंदगियों को अंधेरे में धकेल गया है, बल्कि शहरी नियोजन में सुरक्षा ऑडिट की तत्काल आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। प्रशासन अब बेघर हुए परिवारों के पुनर्वास और बस्ती में दोबारा ऐसी घटना न हो, इसके लिए ठोस कानूनी और सुरक्षात्मक कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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