mamata banerjee delhi protest warning tmc workers : पश्चिम बंगाल की राजनीति सोमवार, 1 जून 2026 को उस समय एक बेहद संवेदनशील और आक्रामक मोड़ पर पहुंच गई, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सर्वोच्च नेता ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर पार्टी को खंडित करने और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की हत्या कराने की गहरी साजिश का एक सनसनीखेज आरोप जड़ दिया। राज्य में जारी भीषण राजनैतिक प्रतिशोध और हिंसा के बीच, ममता बनर्जी ने बेहद कड़े लहजे में केंद्र और स्थानीय कानून व्यवस्था को चुनौती देते हुए साफ कर दिया कि यदि कोलकाता पुलिस ने टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी, तो वे बंगाल की इस सियासी जंग को देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों तक ले जाएंगी।

इस अभूतपूर्व राजनैतिक टकराव की शुरुआत उस समय हुई जब ममता बनर्जी ने एक विशाल जनसभा में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के भारी हुजूम को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने प्रशासनिक बाधाओं का खुलासा करते हुए कहा कि टीएमसी ने मंगलवार, 2 जून 2026 को कोलकाता के ऐतिहासिक रानी रश्मोनी रोड पर एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की आधिकारिक अनुमति मांगी थी, जिसे पुलिस प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया। ममता बनर्जी ने इस प्रशासनिक कदम को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और लोकतंत्र का गला घोंटने वाला करार देते हुए घोषणा की कि तानाशाही रवैये के बावजूद उनका यह आंदोलन किसी भी कीमत पर रुकने वाला नहीं है। उन्होंने विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए कहा कि आज जो लोग यह दुष्प्रचार कर रहे हैं कि शीर्ष नेतृत्व कार्यकर्ताओं के साथ नहीं खड़ा है, वे पूरी तरह से झूठी जानकारी फैला रहे हैं। उन्होंने वर्तमान हालात की तुलना इतिहास के सबसे क्रूर दौर से करते हुए कहा कि आज चारों तरफ अराजकता का माहौल है, जिसे बयां करने के लिए अब शब्द नहीं बचे हैं, लेकिन कुछ विधायकों या सांसदों को डरा-धमकाकर या रिश्वत देकर तृणमूल कांग्रेस को कमजोर नहीं किया जा सकता।

इस पूरे विवाद और आक्रोश की जड़ें हाल ही में टीएमसी के शीर्ष नेताओं पर हुए सिलसिलेवार हिंसक हमलों से जुड़ी हैं। ममता बनर्जी का यह तीखा बयान उनके भतीजे और पार्टी में उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के महज कुछ दिनों बाद आया है। उल्लेखनीय है कि टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर उस समय हिंसक हमला किया गया था जब वे सोनारपुर में चुनाव के बाद घायल हुए एक पीड़ित परिवार से मिलने उनके आवास पर जा रहे थे। इस घटना के तुरंत बाद हुगली में पार्टी के कद्दावर सांसद कल्याण बनर्जी को भी इसी तरह हिंसक तरीके से निशाना बनाया गया था। इन बैक-टू-बैक हुए हमलों को लेकर ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर भाजपा को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि ये छिटपुट घटनाएं नहीं बल्कि टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व को रास्ते से हटाने और उन्हें जान से मारने की एक सोची-समझी और सुनियोजित साजिश का हिस्सा हैं।

प्रशासनिक और वैधानिक मोर्चे पर, ममता बनर्जी ने इन हमलों को मौलिक राजनैतिक अधिकारों का हनन बताते हुए देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य भर में विपक्ष के शह पर टीएमसी कार्यकर्ताओं को सामान्य राजनीतिक गतिविधियां और बैठकें करने से पूरी तरह रोका जा रहा है, जो कानूनन पूरी तरह अवैध है। इसके साथ ही उन्होंने संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आधिकारिक दावा करते हुए कहा कि अब तक पार्टी के लगभग 2,500 कार्यालयों में तोड़फोड़ की जा चुकी है, और स्थिति इस कदर नियंत्रण से बाहर हो चुकी है कि असामाजिक तत्वों द्वारा ईदगाहों पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं और धार्मिक संस्थानों को जबरन बंद कराया जा रहा है। इस बेहद विस्फोटक घटनाक्रम ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में बंगाल की यह सियासी चिंगारी राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा कानूनी और राजनैतिक तूफान खड़ा करने वाली है, जिसका सीधा असर देश की मुख्यधारा की राजनीति पर पड़ेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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