महापरिनिर्वाण दिवस 2025: संविधान निर्माता आंबेडकर की याद में राष्ट्रीय श्रद्धांजलि
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस 6 दिसंबर 1956 को उनके निधन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। संविधान निर्माता के इस स्मृति दिवस का उद्देश्य समानता, न्याय और सामाजिक बदलाव के उनके संदेश को दोहराना है। चैत्यभूमि से पूरे देश तक यह दिन सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों को सशक्त करता है।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर
6 दिसंबर 1956 की सुबह ने भारत को झकझोर दिया था, डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर, संविधान निर्माता, सामाजिक क्रांति के प्रतीक और करोड़ों वंचितों की आशा, ने इसी दिन संसार को अलविदा कहा। उनके निधन के बाद 6 दिसंबर को ‘महापरिनिर्वाण दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा, जो आज भारतीय समाज के लिए केवल स्मृति का दिन नहीं, बल्कि समानता की दिशा में सतत संघर्ष का संकल्प भी है।
- यह दिन समानता, न्याय और मानवाधिकारों के प्रति डॉ. आंबेडकर की प्रतिबद्धता को स्मरण करता है।
- यह समाज को याद दिलाता है कि जातिगत भेदभाव के खिलाफ संघर्ष आज भी जारी है।
- उनकी बौद्ध दीक्षा के बाद फैली ‘नवयान बौद्ध’ धारा को भी यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।
देशभर में इस दिन पर सेमिनार, सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम, संविधान-पाठ, और शांति रैलियों का आयोजन किया जाता है।
- सामाजिक चेतना बढ़ाना,
- शिक्षा और अवसरों में समानता को प्रोत्साहित करना, और
- कानून के समक्ष समानता के सिद्धांत को मजबूती देना
कई राज्य सरकारें 6 दिसंबर को राजकीय श्रद्धांजलि दिवस के रूप में मनाती हैं। महाराष्ट्र में यह दिन सार्वजनिक अवकाश भी होता है। सरकारी प्रतिष्ठानों में संविधान के मूलभूत सिद्धांतों को दोहराते हुए डॉ. आंबेडकर को श्रद्धांजलि दी जाती है। केंद्र और राज्य स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों का उद्देश्य उनके द्वारा स्थापित संवैधानिक मूल्यों को जनमानस तक पहुँचाना है।
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Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
