मध्य प्रदेश: सांस्कृतिक पुनर्जागरण और पर्यटन के स्वर्णिम युग का उदय
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश ने वर्ष 2025 में पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। पीएम श्री वायु सेवा, अद्वैत लोक का निर्माण और नई पर्यटन नीति ने प्रदेश को वैश्विक पहचान दी है। 14 करोड़ पर्यटकों की आमद और हजारों करोड़ के निवेश के साथ राज्य अब देश का अग्रणी पर्यटन केंद्र बन गया है, जो सांस्कृतिक पुनर्जागरण की एक नई गाथा लिख रहा है।

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी दृष्टिकोण और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश आज एक अभूतपूर्व सांस्कृतिक और आर्थिक रूपांतरण का साक्षी बन रहा है। वर्ष 2025 राज्य के इतिहास में एक मील का पत्थर बनकर उभरा है, जहाँ परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ आधुनिक निवेश और नवाचारों ने प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक नई और ओजस्वी पहचान दी है। यह केवल विकास के आंकड़ों का वर्ष नहीं है, बल्कि यह उस संकल्प की सिद्धि है जिसने मध्य प्रदेश को देश के अग्रणी पर्यटन राज्यों की श्रेणी में सबसे आगे खड़ा कर दिया है।
राज्य की इस गौरवशाली यात्रा में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी और अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला के नेतृत्व में मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। कनेक्टिविटी को सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई 'पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा' और 'हेली सेवा' ने प्रदेश के सुदूर और ऐतिहासिक स्थलों के बीच की दूरियों को मिटा दिया है। इन सेवाओं ने न केवल पर्यटकों की यात्रा को सुगम बनाया है, बल्कि प्रदेश में निवेश और रोजगार के ऐसे द्वार खोले हैं, जिनसे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में 400 से अधिक होमस्टे का सफल संचालन ग्रामीण आजीविका को सशक्त कर रहा है, जिसे भविष्य में 1000 तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के इस दौर में ओंकारेश्वर में 'अद्वैत लोक' का विकास एक आध्यात्मिक क्रांति के रूप में उभरा है। आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा की स्थापना के बाद, अब द्वितीय चरण के लिए 2424 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि की स्वीकृति राज्य की धार्मिक पर्यटन के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यही कारण है कि वर्ष 2024 में प्रदेश में 14 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ, जो पिछले वर्षों की तुलना में 25 प्रतिशत की शानदार वृद्धि है। इसके साथ ही 'श्रीरामचंद्र वनगमन पथ' और 'श्रीकृष्ण पाथेय' जैसी परियोजनाओं ने मध्य प्रदेश को दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना दिया है।
निवेश के मोर्चे पर भी मध्य प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई है। नई पर्यटन नीति-2025 और फिल्म पर्यटन नीति-2025 के माध्यम से राज्य ने निवेशकों के लिए एक पारदर्शी और सरल वातावरण तैयार किया है। 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट' और 'मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट' जैसे आयोजनों के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों ने राज्य के पर्यटन बुनियादी ढांचे को नई मजबूती दी है। उज्जैन में आगामी 'सिंहस्थ 2028' की तैयारियों के साथ-साथ प्रदेश भर में विकसित की जा रही संग्रहालयों की नई श्रृंखला, जिसमें भोपाल का 'सिटी म्यूजियम' और ग्वालियर का 'म्यूजियम ऑफ म्यूजिक' शामिल है, भविष्य की पीढ़ियों के लिए विरासत को संजोने का एक महान प्रयास है।
राज्य ने न केवल अवसंरचना पर ध्यान दिया है, बल्कि महिलाओं के लिए सुरक्षित पर्यटन और कौशल विकास को भी अपनी प्राथमिकता बनाया है। 50 हजार महिलाओं को पर्यटन क्षेत्र के विभिन्न विधाओं में प्रशिक्षित कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना सामाजिक सशक्तिकरण का एक अनुपम उदाहरण है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त दर्जनों पुरस्कार और यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल 15 नए स्थल मध्य प्रदेश की प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपन्नता पर वैश्विक मुहर लगाते हैं। आज मध्य प्रदेश अपनी कला, शिल्प, वन्यजीव और गौरवशाली इतिहास के साथ एक ऐसे भविष्य की ओर अग्रसर है, जहाँ पर्यटन केवल मनोरंजन नहीं बल्कि राज्य की जीडीपी का 10 प्रतिशत हिस्सा बनकर खुशहाली का नया आधार बनेगा।

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