लखनऊ अग्निकांड पर CM Yogi का एक्शन ; मीटिंग में अधिकारियों से पूछे 4 तीखे सवाल
अलीगंज अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को फटकार लगाई और सुरक्षा सर्वे पर रिपोर्ट मांगी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक अधिकारियों के साथ लखनऊ के अलीगंज में कोचिंग अग्निकांड स्थल का बारीकी से निरीक्षण कर रहे हैं।
Lucknow coaching center fire case : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज, पुरनिया इलाके में सोमवार को हुए दर्दनाक कोचिंग अग्निकांड ने पूरे प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया है। एक बहुमंजिला इमारत में आग लगने से 15 बेकसूर छात्रों की असमय मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त और बेहद आक्रामक रुख देखने को मिला है। घटना की भयावहता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने तत्काल एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें उन्होंने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और विशेषकर फायर ब्रिगेड के अफसरों पर तीव्र नाराजगी व्यक्त करते हुए उनकी कड़ी क्लास लगाई। सूत्रों के मुताबिक, बंद कमरे में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री का रुख इतना कड़ा था कि वहां मौजूद वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के पसीने छूट गए।
मुख्यमंत्री की मैराथन दौड़ और फौरी एक्शन : अलीगढ़ से सीधे पहुंचे ग्राउंड जीरो
इस दर्दनाक हादसे के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। जैसे ही उन्हें लखनऊ के कोचिंग सेंटर में आग लगने और बच्चों के हताहत होने की प्रारंभिक सूचना मिली, उन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए अपने आगे के सभी कार्यक्रम बीच में ही रोक दिए। मुख्यमंत्री अलीगढ़ से सीधे लखनऊ पहुंचे और बिना समय गंवाए सीधे घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण करने पुरनिया पहुंचे। ग्राउंड जीरो पर मुस्तैदी दिखाते हुए उन्होंने मौके पर मौजूद फायर ब्रिगेड के अधिकारियों को उनकी कार्यशैली और सुरक्षा इंतजामों को लेकर जमकर फटकार लगाई। इसके तुरंत बाद, मुख्यमंत्री किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे घायल छात्रों का हाल जाना और अपने बच्चों को खो चुके शोक संतप्त परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाया।
हाई-लेवल मीटिंग में गूंजे मुख्यमंत्री के 4 सवाल : 'बाकी शहरों का क्या होगा हाल?'
अस्पताल से लौटते ही मुख्यमंत्री आवास पर बुलाई गई आपातकालीन बैठक में योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने फायर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए अधिकारियों के सामने चार बेहद तीखे और सीधे सवाल दागे। मुख्यमंत्री ने बेहद सख्त लहजे में पूछा कि जब प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सुरक्षा व्यवस्था का यह हाल है, तो राज्य के बाकी अन्य शहरों की स्थिति क्या होगी? इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों से सीधा हिसाब मांगते हुए पूछा कि अब तक फायर विभाग द्वारा शहर में कितने सुरक्षा सर्वे किए गए हैं, कितनी अवैध या संवेदनशील व्यावसायिक इमारतों की जमीनी जांच की गई है, और इस चालू वर्ष में विभाग द्वारा कितनी वैध फायर एनओसी जारी की गई हैं? मुख्यमंत्री के इन कड़े सवालों का जवाब देने में बैठक में मौजूद जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह बगलें झांकते नजर आए।
चौंकाने वाले खुलासे: रिहायशी इलाके में मौत का अवैध कारोबार और शून्य सुरक्षा
जैसे-जैसे इस मामले की उच्च स्तरीय जांच आगे बढ़ रही है, इस अग्निकांड के पीछे छिपे बेहद चौंकाने वाले और प्रशासनिक साठगांठ को उजागर करने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। शुरुआती तफ्तीश में यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि जिस तीन मंजिला इमारत में यह अवैध कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी और स्टूडियो संचालित किए जा रहे थे, वह पूरी तरह से एक रिहायशी क्षेत्र (रेसिडेंशियल एरिया) के अंतर्गत आता है। नियमों को ताक पर रखकर इस भवन का इस्तेमाल विशुद्ध रूप से व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि भवन मालिक ने अनिवार्य अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र यानी फायर एनओसी के लिए संबंधित विभाग में कभी आवेदन तक नहीं किया था। हादसे के वक्त जब आग फैली, तो पूरी इमारत में छात्रों के पास बाहर निकलने का केवल एक ही संकरा रास्ता उपलब्ध था, जिसके कारण दम घुटने वाली स्थिति पैदा हो गई और मासूम बच्चों को अपनी जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिल की खिड़कियों और ऊंचाई से सीधे नीचे छलांग लगानी पड़ी।
प्रशासनिक गाज: मुख्यमंत्री ने रद्द किए हाथरस और आगरा के सभी महत्वपूर्ण दौरे
इस राष्ट्रीय त्रासदी के प्रति अपनी गहरी संवेदना और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 23 जून को होने वाले अपने सभी पूर्व निर्धारित आधिकारिक और राजनीतिक दौरों को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री को हाथरस का दौरा कर वहां 548 करोड़ रुपये की लागत वाली 143 अत्यंत महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करना था। इसके अलावा, उन्हें आगरा में भी पहुंचकर पश्चिम उत्तर प्रदेश के विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर एक बड़ी समीक्षा बैठक लेनी थी। इन सभी बड़े कार्यक्रमों को रद्द कर मुख्यमंत्री अब स्वयं लखनऊ से इस पूरे मामले की जांच, अवैध बिल्डिंगों के खिलाफ चलने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान और दोषियों के खिलाफ की जाने वाली दंडात्मक कार्रवाई की सीधी निगरानी कर रहे हैं, जो यह साफ संकेत देता है कि इस महा-लापरवाही में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
