50 करोड़ का बकाया और 500 टैंकरों का चक्का जाम ; नामक्कल में टैंकरों की हड़ताल से आई राहत की खबर
तमिलनाडु के नामक्कल में ₹50 करोड़ बकाया फ्रेट भुगतान को लेकर एलपीजी टैंकर मालिकों की हड़ताल केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद खत्म हो गई। IOCL द्वारा भुगतान शुरू करने और आश्वासन मिलने के बाद आपूर्ति फिर से सामान्य हो गई।

बकाया भुगतान के आश्वासन के बाद एलपीजी टैंकरों की हड़ताल समाप्त
दक्षिण भारत में एलपीजी आपूर्ति को प्रभावित करने वाली टैंकर लोरी मालिकों की हड़ताल ने अचानक उस समय मोड़ ले लिया, जब केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य होने लगी। तमिलनाडु के नामक्कल से उठी यह हड़ताल महज़ एक औद्योगिक विवाद नहीं, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर सीधे असर डालने वाली गंभीर स्थिति बन चुकी थी, जिसने आम उपभोक्ताओं तक गैस आपूर्ति में व्यवधान पैदा कर दिया।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब एलपीजी टैंकर लोरी मालिकों ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के प्लांट्स से गैस लोडिंग पूरी तरह रोक दी। उनका आरोप था कि पिछले चार महीनों से करीब ₹50 करोड़ की फ्रेट (ढुलाई) राशि का भुगतान लंबित है। इस मुद्दे पर बार-बार आग्रह करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण 27 अप्रैल 2026 की सुबह से यह हड़ताल शुरू की गई, जिसमें लगभग 500 टैंकर शामिल हुए। हालांकि अन्य तेल कंपनियों के प्लांट्स पर कामकाज जारी रहा, लेकिन IOCL की आपूर्ति प्रणाली पर इसका सीधा असर पड़ा।
दक्षिणी क्षेत्र बल्क एलपीजी ट्रांसपोर्ट ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुंदरराजन के अनुसार, प्रत्येक टैंकर पर ₹5 लाख से ₹35 लाख तक की राशि चार महीनों से बकाया थी। यह स्थिति परिवहनकर्ताओं के लिए आर्थिक रूप से असहनीय हो चुकी थी। हड़ताल के दौरान प्रतिदिन लगभग 1,000 से 1,500 टैंकर सड़कों से दूर रहे, जिससे सप्लाई चेन बाधित हुई और एलपीजी सिलेंडरों की ढुलाई में अस्थायी देरी देखने को मिली। उद्योग सूत्रों के अनुसार, इस ठहराव से प्रतिदिन करीब ₹3 करोड़ का आर्थिक नुकसान भी हुआ।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यूनियन पेट्रोलियम मंत्रालय और IOCL के अधिकारियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया। सोमवार दोपहर हुई वार्ता के दौरान अधिकारियों ने न केवल आंशिक भुगतान जारी करना शुरू किया, बल्कि अगले दो दिनों के भीतर सभी बकाया राशि चुकाने का आश्वासन भी दिया। इस ठोस आश्वासन के बाद शाम तक टैंकर मालिकों ने हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया और सामान्य रूप से लोडिंग कार्य फिर से शुरू हो गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में परिवहन क्षेत्र की भूमिका कितनी अहम है। समय पर भुगतान और समन्वय की कमी किस तरह बड़े स्तर पर व्यवधान पैदा कर सकती है, यह इस घटना से सामने आया। फिलहाल हड़ताल समाप्त हो चुकी है और प्रभावित क्षेत्रों में एलपीजी आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन यह मामला प्रशासन और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक के रूप में सामने आया है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
