सूरत में एलपीजी संकट और युद्ध के कारण फैक्ट्रियां बंद, उधना स्टेशन पर प्रवासी मजदूरों का भारी पलायन। जानें कैसे ईरान युद्ध ने छीनी हजारों की रोजी-रोटी।

LPG shortage in Surat factories shutdown : गुजरात की आर्थिक राजधानी और 'डायमंड सिटी' कहे जाने वाले सूरत से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है, जिसने साल 2020 के लॉकडाउन की कड़वी यादें ताजा कर दी हैं। रविवार को सूरत का उधना रेलवे स्टेशन हजारों प्रवासी मजदूरों की चीख-पुकार और भारी भीड़ का गवाह बना, जो एलपीजी (LPG) संकट के कारण काम बंद होने के बाद अपने घरों को लौटने के लिए जद्दोजहद कर रहे थे। शहर की जीवन रेखा कही जाने वाली पावरलूम और डाइंग फैक्ट्रियों में सन्नाटा पसरा हुआ है, क्योंकि ईंधन की कमी ने औद्योगिक उत्पादन के पहियों को पूरी तरह रोक दिया है। यह संकट केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार सुदूर पश्चिम एशिया में चल रहे 2026 के ईरान युद्ध से जुड़े हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में मचे घमासान के कारण भारत में एलपीजी के आयात में 15 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर सूरत के औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ा है।

स्टेशन पर स्थिति उस समय और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब चिलचिलाती गर्मी और उमस के बीच हजारों की संख्या में मजदूर अपने परिवारों के साथ कोचों में जगह पाने के लिए संघर्ष करने लगे। फैक्ट्रियों में तालाबंदी के कारण न केवल उनकी आजीविका छिन गई है, बल्कि घरों में खाना पकाने के लिए गैस की अनुपलब्धता ने उन्हें भूखे पेट पलायन करने पर मजबूर कर दिया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया और रविवार को लगभग 21,000 से अधिक यात्रियों की रवानगी सुनिश्चित की गई। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के दावों के विपरीत, रेल प्रशासन ने स्टेशन पर किसी भी तरह की भगदड़ की घटना से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए थे, लेकिन भीषण गर्मी के कारण कुछ यात्रियों के बेहोश होने की खबरें जरूर सामने आई हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक प्रवासी मजदूर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह सिसकते हुए अपनी बेबसी बयां कर रहा है। उसका यह वायरल संदेश उन हजारों मजदूरों के डर को दर्शाता है जो अब शायद कभी सूरत की इन सूनी फैक्ट्रियों में वापस न लौटें। कानूनी और आधिकारिक दृष्टिकोण से देखें तो औद्योगिक संगठनों ने सरकार से ईंधन आपूर्ति बहाल करने की गुहार लगाई है, क्योंकि उत्पादन रुकने से न केवल मजदूरों का पलायन हो रहा है, बल्कि करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान भी हो रहा है। प्रशासन के लिए चुनौती अब केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने की नहीं, बल्कि उन प्रवासी श्रमिकों के भरोसे को बहाल करने की भी है, जो शहर के विकास की रीढ़ हैं। यदि यह संकट जल्द नहीं सुलझा, तो सूरत के कपड़ा और हीरा उद्योग को एक लंबे समय तक चलने वाली मंदी और श्रम शक्ति की कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिसका प्रभाव राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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