Loksabha WINTER SESSION 2025 : लोकसभा में दो दिनों से चल रही चुनाव सुधारों पर व्यापक बहस का जवाब बुधवार को गृहमंत्री अमित शाह ने दिया, और उनके भाषण ने सदन में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ा दिया। शाह ने विपक्ष के आरोपों पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि घुसपैठियों को मतदाता सूची में शामिल करने का मुद्दा कोई साधारण आरोप नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और चुनावी शुचिता से जुड़ा संवेदनशील प्रश्न है।

गृहमंत्री ने तीखे लहजे में कहा कि यदि घुसपैठिये तय करें कि देश का प्रधानमंत्री कौन होगा और मुख्यमंत्री कौन बनेगा, तो फिर लोकतंत्र सुरक्षित नहीं रह सकता। इसी संदर्भ में उन्होंने NDA की बहुचर्चित 3D नीति—डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट—का उल्लेख किया, यह स्पष्ट संकेत देते हुए कि सरकार घुसपैठ को किसी भी सूरत में बढ़ावा नहीं देगी और न ही उसे नजरअंदाज किया जाएगा।

शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अनावश्यक भ्रम फैला रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह प्रचारित कर रहा है कि सरकार संसद में चर्चा से भाग रही है, जबकि सच यह है कि NDA कभी बहस से पीछे नहीं हटती। उनका कहना था कि विपक्ष की मांग चुनाव आयोग की भूमिका से जुड़ी थी, और ऐसे मामलों पर चर्चा करने का अधिकार संविधान ने आयोग को दिया है। इसलिए सदन में इस पर सवाल उठाना प्रक्रिया और संवैधानिक मर्यादा दोनों के विपरीत है।

गृहमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR (Systematic Investigation of Roll) कोई नई प्रक्रिया नहीं है। यह वर्षों से चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में है और संविधान के अनुच्छेद 324 और 327 के तहत आयोग को मतदाता सूची की शुचिता बनाए रखने के लिए स्वतंत्र शक्तियाँ प्राप्त हैं। उन्होंने कहा कि जब चुनाव आयोग की यह व्यवस्था बनी थी, तब वर्तमान राजनीतिक समीकरणों का अस्तित्व भी नहीं था, इसलिए इसके राजनीतिकरण की कोशिश अनुचित है।

चर्चा के दौरान शाह ने यह दोहराया कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, और देश की चुनावी व्यवस्था की रीढ़ भी। मतदाता पात्रता का निर्धारण, सूची का अपडेट और जांच पड़ताल, सभी प्रक्रियाएँ आयोग की जिम्मेदारी में आती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि घुसपैठियों का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो, क्योंकि यह सीधे तौर पर लोकतंत्र की पवित्रता को प्रभावित करता है।

अंत में, शाह का बयान इस संदेश के साथ समाप्त हुआ कि देश की सुरक्षा, चुनावों की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। NDA की 3D नीति इसी दृढ़ संकल्प का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य घुसपैठ को रोकना और निर्वाचन व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित रखना है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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