नासिक में कुंभ तैयारियों के बीच हरित विरासत पर संकट; प्राचीन बरगद की कटाई पर भड़का जनआक्रोश
नासिक में कुंभ मेला 2026 की तैयारियों के लिए प्राचीन बरगद के पेड़ों की कटाई पर भारी विरोध। कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर चला प्रशासन का बुलडोजर, NGT में मामला लंबित।

नासिक में कुंभ मेला तैयारियों के लिए प्राचीन बरगद के पेड़ों की कटाई का विरोध करते पर्यावरणविदों और पुलिस के बीच हाथापाई का दृश्य।
Nashik Kumbh Mela 2026 tree cutting protest : धर्म और आस्था की नगरी नासिक इस समय एक गंभीर अंतर्द्वंद्व से जूझ रही है। वर्ष 2026 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के नाम पर शहर की सदियों पुरानी प्राकृतिक विरासत को बेरहमी से उजाड़ने का मामला गरमा गया है। सड़कों के चौड़ीकरण और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए नासिक नगर निगम (NMC) द्वारा प्राचीन बरगद, पीपल और इमली के पेड़ों की धड़ल्ले से की जा रही कटाई ने पर्यावरणविदों और आम नागरिकों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। सोमवार को गंगापुर रोड पर उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब स्थानीय निवासियों और कार्यकर्ताओं ने प्रशासन की मशीनों के आगे खड़े होकर इस विनाश को रोकने की कोशिश की। यह विवाद केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर के पारिस्थितिक भविष्य और विकास की अंधी दौड़ के बीच एक निर्णायक जंग बन चुका है।
घटनाक्रम की शुरुआत रविवार, 5 अप्रैल को हुई, जब प्रशासन ने कथित तौर पर रणनीतिक रूप से छुट्टी के दिन का चयन किया ताकि विरोध की गुंजाइश कम रहे। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रमुख पर्यावरण प्रेमियों को "चिह्नित" कर उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया, जिससे प्रशासन को जेहान सर्कल और बरदान फाटा के बीच बिना किसी बाधा के कुल्हाड़ी चलाने की छूट मिल गई। कुछ ही घंटों के भीतर, उन विशालकाय बरगद के पेड़ों को जमींदोज कर दिया गया जो नासिक की कई पीढ़ियों के साक्षी रहे थे। सोशल मीडिया पर इस विनाश के वीडियो वायरल होते ही शहर का गुस्सा फूट पड़ा। सोमवार सुबह प्रदर्शनकारियों ने "विरासत बरगद के वृक्षों को बचाओ" के नारों के साथ काम रोकने का प्रयास किया, लेकिन भारी पुलिस बल ने उन्हें हिरासत में लेकर आंदोलन को दबाने की कोशिश की। कुछ कार्यकर्ता तो पेड़ों को बचाने की खातिर उन पर चढ़ गए, जिन्हें पुलिस ने बलपूर्वक नीचे उतारा।
इस पूरे प्रकरण में कानूनी पहलुओं की अनदेखी के गंभीर आरोप लग रहे हैं। महाराष्ट्र वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1964 और उसके 2019 के संशोधनों के अनुसार, 90 वर्ष से अधिक पुराने 'विरासत वृक्षों' की कटाई पर कड़ा प्रतिबंध है। इसके बावजूद, सदियों पुराने पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई, जिसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। हालांकि प्रशासन ने प्रति पेड़ 10 पौधे लगाने और कुछ पेड़ों के स्थानांतरण का आश्वासन दिया है, लेकिन तपोवन और गंगापुर रोड के पर्यावरणविदों का तर्क है कि दशकों पुराने विशाल वृक्षों का स्थान नन्हे पौधे कभी नहीं ले सकते। मामला वर्तमान में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) के समक्ष लंबित है, जिसने पहले ही 28 अप्रैल तक कई क्षेत्रों में कटाई पर रोक के आदेश दिए थे, लेकिन कार्यकर्ताओं का दावा है कि नंदिनी पुल जैसे स्थलों पर नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हालांकि प्रशासन से पेड़ों की कटाई कम से कम करने और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की अपील की है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अनुमान है कि कुंभ मेले की तैयारियों के दौरान करीब 5,000 से 6,000 पेड़ बलि चढ़ सकते हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इन पेड़ों के कटने से शहर का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने का खतरा पैदा हो गया है, जो नासिक की सुखद जलवायु के लिए एक बड़ा झटका होगा। यह संघर्ष अब नासिक की अस्मिता और उसकी हरियाली को बचाने का एक बड़ा आंदोलन बन चुका है। भविष्य के विकास के लिए अतीत की जड़ों को काटना कितना तर्कसंगत है, यह सवाल आज नासिक के हर चौराहे पर गूंज रहा है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
