मराठी समाज सुधारक और आध्यात्मिक नेता संत गाडगे महाराज का जीवन हमेशा से सेवा और शिक्षा के आदर्शों से प्रेरित रहा। उनका असली नाम देबुजी झिंगराज जानोरकर था। वे महाराष्ट्र के अमरावती जिले के शेंडगांव गांव में एक पिछड़े वर्ग के धोबी परिवार में जन्मे थे। उनके बचपन और प्रारंभिक जीवन ने ही उनके समाज सेवा और सरल जीवन के आदर्शों को आकार दिया।

गाडगे महाराज अपने "कीर्तन" के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाते थे। इन कीर्तनों में वे अंधविश्वास और अनावश्यक रीति-रिवाजों के खिलाफ शिक्षाप्रद संदेश देते थे। वे संत कबीर की दोहों का उपयोग कर लोगों को सरल, लेकिन गहन संदेश देते। उनके उपदेशों का केंद्र हमेशा मानवता की सेवा, करुणा और शिक्षा को बढ़ावा देना रहा।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, जिन्होंने राजनीति के माध्यम से सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया, गाडगे महाराज के उपदेशों से अत्यधिक प्रभावित थे। दोनों युगपुरुषों का दृष्टिकोण अलग था एक कीर्तन और सत्संग के माध्यम से और दूसरा राजनीतिक और शैक्षणिक माध्यम से लेकिन उद्देश्य समान था: समाज में समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय स्थापित करना।

गाडगे महाराज ने डॉ. आंबेडकर की शिक्षा और उनके व्यक्तित्व की सराहना की। वे अक्सर अपने अनुयायियों को शिक्षा के महत्व के बारे में बताते और आंबेडकर का उदाहरण देते: "देखो, कैसे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने कठिन परिश्रम से ज्ञान अर्जित किया। शिक्षा किसी जाति या वर्ग का विशेषाधिकार नहीं है। गरीब का पुत्र भी कई डिग्रियाँ प्राप्त कर सकता है।"

दोनों महापुरुषों की दोस्ती और सहयोग का प्रतीक है गाडगे महाराज द्वारा पंढरपुर में अपने छात्रावास की इमारत को डॉ. आंबेडकर द्वारा स्थापित पीपल्स एजुकेशन सोसाइटी को दान करना। इस प्रकार वे शिक्षा के प्रसार में सीधे योगदान देने वाले समाज सुधारक बने। गाडगे महाराज और आंबेडकर कई बार व्यक्तिगत रूप से मिले और सामाजिक सुधार, शिक्षा और समानता पर गहन चर्चा की। आंबेडकर ने गाडगे महाराज को ज्योंतिराव फुले के बाद "जनता का सबसे बड़ा सेवक" बताया। यह संबोधन उनके समाज सेवा के दृष्टिकोण और उनके योगदान की व्यापक सराहना को दर्शाता है।

आज भी, गाडगे महाराज और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का यह संबंध प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। यह न केवल शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे आध्यात्मिक और राजनीतिक दृष्टिकोण मिलकर समाज में व्यापक परिवर्तन ला सकते हैं। उनके आदर्श और उपदेश आज भी समाज के पिछड़े वर्गों को शिक्षित और सशक्त बनाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

गाडगे महाराज और आंबेडकर का यह जुड़ाव यह स्पष्ट करता है कि सच्ची समाज सेवा में जाति, वर्ग या धर्म की सीमाएं मायने नहीं रखतीं। यह संबंध आज भी समाज सुधार और शिक्षा के महत्व को उजागर करता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बना हुआ है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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