कश्मीरी पंडितों ने दशकों बाद कुपवाड़ा में निकाली भव्य जन्माष्टमी शोभायात्रा
कुपवाड़ा में कश्मीरी पंडितों ने दशकों बाद जन्माष्टमी की भव्य शोभायात्रा निकाली। टिक्कर से त्रेहगाम तक करीब 7 किलोमीटर की यात्रा में श्रद्धालु शामिल हुए और सुरक्षा के बीच आयोजन शांतिपूर्ण रहा।

तस्वीर में कुपवाड़ा में भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शोभायात्रा के दौरान फूलों से सजी पालकी और बड़ी संख्या में शामिल श्रद्धालु व सुरक्षाकर्मी नजर आ रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में शुक्रवार को कश्मीरी पंडित समुदाय ने दशकों बाद भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की भव्य शोभायात्रा निकाली। लंबे समय से आयोजित नहीं हुई इस धार्मिक परंपरा के पुनर्जीवन के अवसर पर कुपवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों से कश्मीरी पंडित बड़ी संख्या में शामिल हुए और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को श्रद्धा एवं पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया।
शोभायात्रा की शुरुआत टिक्कर स्थित माता खीर भवानी मंदिर से हुई और यह करीब सात किलोमीटर की दूरी तय करते हुए त्रेहगाम स्थित शिव मंदिर पहुंची। यात्रा में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लिया, जिससे पूरे मार्ग पर धार्मिक माहौल बना रहा।
श्रद्धालु धार्मिक झंडे लेकर चल रहे थे और भजन-कीर्तन करते हुए त्रेहगाम की ओर बढ़े। कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए यह आयोजन खास महत्व रखता है, क्योंकि क्षेत्र में कई दशकों से यह धार्मिक शोभायात्रा आयोजित नहीं हुई थी। विभिन्न पीढ़ियों के लोगों की भागीदारी ने इस आयोजन को और महत्वपूर्ण बना दिया। श्रद्धालु जन्माष्टमी मनाने के साथ अपनी लंबे समय से चली आ रही धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से फिर जुड़े।
कुपवाड़ा के विभिन्न हिस्सों और आसपास के क्षेत्रों से आए कश्मीरी पंडितों ने करीब सात किलोमीटर लंबी इस शोभायात्रा में हिस्सा लिया। टिक्कर से त्रेहगाम तक का मार्ग श्रद्धालुओं की मौजूदगी से भरा रहा और पूरी यात्रा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। त्रेहगाम के शिव मंदिर पहुंचने के बाद भी धार्मिक आयोजन और जन्माष्टमी समारोह जारी रहे।
शोभायात्रा के दौरान कुपवाड़ा के एसएसपी सैयद अल-ताहिर गिलानी भी मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुचारु बनाए रखने और धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पूरे मार्ग पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। अधिकारियों ने पूरे मार्ग पर कानून-व्यवस्था बनाए रखी और शोभायात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
देशभर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर विशेष प्रार्थनाओं, धार्मिक अनुष्ठानों और मंदिरों में आयोजनों के बीच कुपवाड़ा में दशकों बाद निकली यह जन्माष्टमी शोभायात्रा कश्मीरी पंडित समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा के पुनर्जीवन का महत्वपूर्ण अवसर बनी।
जन्माष्टमी को गोकुलाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व भगवान कृष्ण के जन्म की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्हें हिंदू परंपरा में भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है। यह त्योहार हिंदू महीने भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी, यानी अंधकारमय पखवाड़े के आठवें दिन मनाया जाता है, जो सामान्यतः अगस्त या सितंबर में पड़ता है।

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