Telugu Ganga canal water supply : भीषण गर्मी और तपते मौसम के बीच तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई और उसके आस-पास के इलाकों के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। लंबे इंतजार और प्रशासनिक कोशिशों के बाद, आंध्र प्रदेश के कंदलेरू जलाशय से छोड़ा गया कृष्णा नदी का पानी आखिरकार तेलुगु गंगा नहर प्रणाली के माध्यम से तमिलनाडु की सीमा में दाखिल हो चुका है। इस जल प्रवाह के शुरू होने से चेन्नई महानगर और उसके उपनगरों में गहराते पेयजल संकट पर काफी हद तक लगाम लगने की उम्मीद जताई जा रही है। जल संसाधन विभाग (WRD) के वरिष्ठ अधिकारियों से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कृष्णा नदी का यह पवित्र जल तिरुवल्लूर जिले के उथुकोट्टई स्थित 'जीरो पॉइंट' से होते हुए तमिलनाडु की सीमा में प्रवेश कर चुका है और अब यह चेन्नई की लाइफलाइन माने जाने वाले प्रमुख पूंडी जलाशय की तरफ तेजी से बढ़ रहा है।

इस महत्वपूर्ण जल आपूर्ति के जमीनी आंकड़ों पर नजर डालें तो पूंडी जलाशय में पानी का प्रवाह लगातार मजबूत हो रहा है। शुरुआत में जहां सीमा पर जल का प्रारंभिक प्रवाह महज 50 क्यूसेक (घन फुट प्रति सेकंड) दर्ज किया गया था, वहीं अब यह रफ्तार पकड़कर 75 क्यूसेक के स्तर पर पहुंच चुकी है। जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस प्रवाह में और अधिक तेजी देखने को मिलेगी। यह पानी ऐसे बेहद नाजुक और महत्वपूर्ण समय पर चेन्नई पहुंचा है, जब शहर के सभी प्रमुख पेयजल जलाशयों में कुल मिलाकर केवल 7.154 हजार मिलियन घन फुट (TMC फीट) पानी ही शेष बचा था। यह कुल जल भंडारण क्षमता का महज 54.11 प्रतिशत है। ऐसे में घटते जलस्तर के बीच आंध्र प्रदेश से आए इस पानी ने चेन्नई के जल संकट को टालने में एक सुरक्षा कवच की तरह काम किया है।

इस जल आपूर्ति के पीछे दोनों राज्यों के बीच हुए हालिया कूटनीतिक और प्रशासनिक प्रयास शामिल हैं। तमिलनाडु सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने भीषण गर्मी में चेन्नई की पेयजल मांग को पूरा करने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार से अतिरिक्त पानी छोड़ने का विशेष और औपचारिक अनुरोध किया था। पड़ोसी राज्य की इस गंभीर मानवीय जरूरत को समझते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने तत्परता दिखाई और कंदलेरू जलाशय से लगभग 1,900 क्यूसेक पानी तेलुगु गंगा नहर नेटवर्क में छोड़ दिया। हालांकि, तमिलनाडु की सीमा तक पहुंचने के लिए इस पानी को नहर प्रणाली के माध्यम से करीब 152 किलोमीटर की एक लंबी दूरी तय करनी पड़ी। तकनीकी अधिकारियों ने पहले अनुमान लगाया था कि यह पानी 25 मई तक ही 'जीरो पॉइंट' पर पहुंच जाएगा, लेकिन अंततः यह तीन दिन की देरी से 28 मई को सीमा पर पहुंचा। जल संसाधन विकास विभाग के अनुसार, इस देरी की मुख्य वजह तेलुगु गंगा नहर के कई हिस्सों में लंबे समय से खराब रखरखाव, गाद का जमा होना और मार्ग में हुआ भारी रिसाव (लीकेज) व जल अवशोषण था, जिसने पानी की रफ्तार को धीमा कर दिया।

वैधानिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की बात करें तो यह पूरी जल आपूर्ति दोनों राज्यों के बीच हुए ऐतिहासिक 'तेलुगु गंगा परियोजना समझौते' के कानूनी प्रावधानों के तहत संचालित की जाती है। इस अंतर-राज्यीय समझौते के अनुसार, आंध्र प्रदेश सरकार चेन्नई की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रतिवर्ष कुल 12 टीएमसी फीट कृष्णा नदी का पानी तमिलनाडु को देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। इस व्यवस्था को दो चरणों में विभाजित किया गया है, जिसके तहत जुलाई से अक्टूबर की अवधि के बीच आठ टीएमसी फीट और जनवरी से अप्रैल के बीच चार टीएमसी फीट पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। अधिकारियों ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया है कि इस समझौते के तहत मिल रहे निरंतर जल प्रवाह से चेन्नई के जलाशयों का ढांचा बेहद मजबूत होगा। यह सफल जल संचरण न केवल आने वाले महीनों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि जल संकट की आहट से सहमे चेन्नई के लाखों नागरिकों को एक बड़ी सांत्वना और जीवनदान भी देगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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