कोलकाता के पश्चिमी हिस्से स्थित तारातला क्षेत्र में बुधवार, 24 जून 2026 को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया, जब ब्रिज के पास स्थित एक तीन मंजिला निर्माणाधीन गोदाम अचानक भरभराकर ढह गया। यह हादसा उस समय हुआ जब भवन में निर्माण कार्य जारी था और भारी मात्रा में श्रमिक मौके पर मौजूद थे। देखते ही देखते पूरी संरचना का ढांचा और छत अचानक ध्वस्त हो गया, जिससे दर्जनों मजदूर भारी कंक्रीट और लोहे के मलबे के नीचे दब गए।

इस भीषण दुर्घटना में अब तक मृतकों की संख्या बढ़कर 15 तक पहुंच चुकी है। शुरुआती रिपोर्टों में जहां 3 मौतों की पुष्टि हुई थी, वहीं राहत एवं बचाव कार्य के आगे बढ़ने के साथ मलबे से लगातार शवों के मिलने और अस्पताल में इलाज के दौरान कुछ घायलों की मृत्यु के कारण यह आंकड़ा बढ़ता गया। इस हादसे में लगभग 18 से 20 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत नाजुक बताई जा रही है।

घटना के बाद से ही इलाके में बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), भारतीय सेना, कोलकाता पुलिस, दमकल विभाग और सिविल डिफेंस की संयुक्त टीमें लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। बचाव कार्य में भारी मशीनरी, क्रेन, खोजी कुत्तों और ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, लगातार बारिश और अस्थिर मलबे के कारण अभियान में कठिनाइयाँ बनी हुई हैं, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि कितने लोग अभी भी मलबे में फंसे हो सकते हैं।

जानकारी के अनुसार, हादसे के समय मौके पर लगभग 50 से 60 श्रमिक मौजूद थे। अब तक करीब 30 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, लेकिन लापता श्रमिकों की सही संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, क्योंकि निर्माण स्थल पर मजदूरों का सही रिकॉर्ड या लॉगबुक उपलब्ध नहीं थी।

प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि निर्माण कार्य के दौरान संभवतः कंक्रीट ढलाई के समय संरचनात्मक कमजोरी उत्पन्न हुई, जिसके चलते यह भयावह गिरावट हुई। साथ ही इंजीनियरिंग निगरानी की कमी, भवन निर्माण मानकों के उल्लंघन और श्रमिक सुरक्षा प्रोटोकॉल में गंभीर खामियों की आशंका भी जताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जो पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रहा है।

पुलिस ने इस मामले में अब तक लगभग 5 से 6 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें साइट सुपरवाइज़र, स्ट्रक्चरल इंजीनियर और परियोजना से जुड़े कुछ अन्य जिम्मेदार व्यक्ति शामिल बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां निर्माण अनुमति प्रक्रिया, सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और संभावित लापरवाही या भ्रष्टाचार के पहलुओं की गहनता से पड़ताल कर रही हैं।

राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये और घायलों को 1 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की गई है। हालांकि, इस दर्दनाक हादसे के बाद राजनीतिक स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच निर्माण अनुमति और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। यह हादसा एक बार फिर शहरी निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों, निगरानी व्यवस्था और श्रमिक रिकॉर्ड प्रबंधन की गंभीर खामियों को उजागर करता है। राहत एवं बचाव कार्य अभी भी जारी है और प्रशासन को आशंका है कि मलबे के नीचे अभी भी और लोग फंसे हो सकते हैं, जिससे मृतकों की संख्या में और वृद्धि संभव है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story