ममता राज का वह 'अदृश्य शख्स', जिसके एक फोन पर घुटनों पर आती थी पुलिस; जानें कैसे पहुंचा सोना पप्पू सलाखों के पीछे
प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग और जबरन वसूली के आरोपों में कोलकाता के रसूखदार सिंडिकेट संचालक बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू को गिरफ्तार किया.

जबरन वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किया गया कोलकाता का सिंडिकेट संचालक बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू.
Sona Pappu arrested : पश्चिम बंगाल की राजनीति और अंडरवर्ल्ड के खतरनाक कॉकटेल का सबसे खूंखार चेहरा रहा बिस्वजीत पोद्दार उर्फ 'सोना पप्पू' आखिरकार कानून के फंदे में फंस गया है. कोलकाता के साल्टलेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों ने करीब दस घंटे की मैराथन पूछताछ के बाद इस कुख्यात डॉन को मनी लॉन्ड्रिंग और जबरन वसूली के संगीन आरोपों में गिरफ्तार कर लिया. पिछले तीन महीनों से कानून की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा यह बाहुबली जब भारी सुरक्षा के बीच ईडी दफ्तर पहुंचा, तो उसे अंदाजा नहीं था कि केंद्रीय एजेंसी के पास उसकी सल्तनत को ढहाने का पूरा दस्तावेज तैयार है. ईडी के तीखे सवालों के सामने डॉन की बरसों की हेकड़ी धरी की धरी रह गई और वित्तीय गबन के पुख्ता सबूत मिलने के बाद देर रात उसकी गिरफ्तारी दर्ज कर ली गई. इस कार्रवाई को कोलकाता के उस सिंडिकेट राज की ताबूत में आखिरी कील माना जा रहा है, जिसने पुलिस प्रशासन को पंगु बनाकर सालों तक एक समानांतर सरकार चलाई.
कोलकाता के कसबा, गोलपार्क और जादवपुर जैसे वीआईपी और रसूखदार इलाकों में सोना पप्पू का नाम ही दहशत और वसूली का दूसरा नाम बन चुका था. खुद को एक साधारण नागरिक के चोले में छिपाकर रखने वाले इस डॉन का असली साम्राज्य जमीन कब्जाने, प्रमोटरों से रंगदारी वसूलने और सरेआम हथियार लहराकर खौफ पैदा करने पर टिका था. दक्षिण कोलकाता के रीयल एस्टेट बाजार में उसकी मर्जी के बिना एक ईंट भी नहीं रखी जा सकती थी. इस सिंडिकेट राज का सबसे स्याह पहलू यह था कि इस डॉन को तत्कालीन राजनीतिक व्यवस्था और पुलिस महकमे का खुला संरक्षण प्राप्त था, जिसके दम पर उसने सालों तक कानून व्यवस्था को बंधक बनाए रखा.
ईडी की तफ्तीश में जो सबसे चौंकाने वाला और शर्मनाक खुलासा हुआ है, वह यह है कि कोलकाता पुलिस की स्पेशल ब्रांच के डिप्टी कमिश्नर (DC) शांतनु सिन्हा बिस्वास खुद इस सिंडिकेट के मुख्य रणनीतिकार और पार्टनर थे. शांतनु सिन्हा कभी मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र कालीघाट थाने के प्रभारी रह चुके थे और सत्ता के गलियारों में उनकी गहरी पैठ थी. जांच में सामने आया है कि सोना पप्पू के जरिए होने वाली अवैध वसूली और जमीनों के धंधे की काली कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा इस पुलिस अधिकारी और व्यवसायी जय एस कामदार की तिजोरियों में ट्रांसफर किया जाता था. पुलिस और अपराधियों के इसी गठजोड़ का नतीजा था कि कोई भी पीड़ित बिल्डर या आम नागरिक जब थाने में शिकायत करने जाता, तो पुलिसकर्मी उसे ही डरा-धमकाकर भगा देते थे. उच्च स्तर से साफ निर्देश थे कि सोना पप्पू के खिलाफ कोई एफआईआर या डायरी दर्ज नहीं होगी.
इस डॉन का दुस्साहस इस कदर बढ़ चुका था कि अदालत द्वारा भगौड़ा घोषित होने और लुकआउट नोटिस जारी होने के बावजूद वह कोलकाता के ही सुरक्षित ठिकानों पर बैठकर फेसबुक लाइव करता था और केंद्रीय एजेंसियों को खुलेआम चुनौती देता था. उसे पूरा भरोसा था कि राज्य की सत्ता और खाकी का वरदहस्त जब तक उसके सिर पर है, उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. हालांकि, रवींद्र सरोबर बमबारी मामले के बाद जब ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से जांच शुरू की, तो भ्रष्टाचार का यह अभेद्य किला ताश के पत्तों की तरह ढह गया. एजेंसी ने सबसे पहले इस नेटवर्क के फाइनेंसर जय कामदार को दबोचा, जिसके कबूलनामे के आधार पर डीसी शांतनु सिन्हा बिस्वास के आवास पर पंद्रह घंटे की छापेमारी हुई और उन्हें जेल भेज दिया गया.
जैसे ही पुलिसिया संरक्षण का यह सुरक्षा चक्र टूटा, सोना पप्पू पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया. सोमवार को जब वह ईडी दफ्तर में दाखिल हो रहा था, तब भी मीडिया के कैमरों के सामने छाती ठोककर खुद को बेगुनाह बता रहा था. लेकिन बंद कमरे में जब अधिकारियों ने उसके बेनामी बैंक खातों, करोड़ों के संदिग्ध लेन-देन के दस्तावेज और जेल में बंद डीसी शांतनु सिन्हा के बयानों को सामने रखा, तो डॉन के पसीने छूट गए. वह वित्तीय हेरफेर के तकनीकी और कानूनी सवालों का एक भी जवाब नहीं दे सका. इस ऐतिहासिक गिरफ्तारी ने न केवल कोलकाता के अरबों रुपये के सिंडिकेट राज का अंत कर दिया है, बल्कि अब इसकी आंच उन सफेदपोश राजनेताओं तक पहुंचने वाली है जो इस काले साम्राज्य के सहारे अपनी सियासी जमीन सींच रहे थे.

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
