भारत के क्षेत्रीय विमानन क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। लंबे समय से प्रतीक्षित सीप्लेन सेवा अब वास्तविकता बनने के बेहद करीब है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ (UDAN) के तहत कोच्चि और लक्षद्वीप के अगत्ती द्वीप के बीच देश की पहली वाणिज्यिक सीप्लेन सेवा 22 जून 2026 के आसपास शुरू होने की संभावना है। सफल परीक्षण उड़ानों और आवश्यक नियामकीय मंजूरियों के बाद यह परियोजना अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जिससे भारत के सबसे दूरस्थ द्वीपीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को नई गति मिलने की उम्मीद है।

इस सेवा का प्रारंभिक संचालन केरल के कोच्चि से लक्षद्वीप के अगत्ती द्वीप तक किया जाएगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा इसके औपचारिक उद्घाटन की तैयारी की जा रही है, जबकि सुरक्षा और प्रशासनिक मंजूरियों की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। यह परियोजना विशेष रूप से लक्षद्वीप जैसे दूरस्थ क्षेत्रों को देश के मुख्य भूभाग से बेहतर तरीके से जोड़ने के उद्देश्य से विकसित की गई है।

सीप्लेन सेवा के संचालन के लिए डी हैविलैंड कनाडा डीएचसी-6 ट्विन ऑटर सीप्लेन का उपयोग किया जाएगा। यह विमान जल निकायों, लैगून और समुद्री सतह पर उतरने तथा उड़ान भरने में सक्षम है। लगभग 18 से 20 यात्रियों की क्षमता वाले इस विमान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी शॉर्ट टेकऑफ और लैंडिंग क्षमता है, जो इसे द्वीपीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बनाती है। इस परियोजना का संचालन स्काईहॉप एविएशन द्वारा किया जाएगा, जिसे महानिदेशालय नागरिक उड्डयन (DGCA) से एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट भी प्राप्त हो चुका है।

परियोजना के पहले चरण में कोच्चि और अगत्ती के बीच सीधी कनेक्टिविटी स्थापित की जाएगी। हालांकि परीक्षण चरण के दौरान कोच्चि-अगत्ती-कल्पेनी-कवारत्ती और कोच्चि-कदमत-किल्तान-अगत्ती जैसे विस्तारित मार्गों पर भी उड़ानों का परीक्षण किया गया। भविष्य में लक्षद्वीप के विभिन्न द्वीपों के बीच नियमित हॉपिंग सेवाएं शुरू करने और केरल के अन्य जल हवाई अड्डों तक नेटवर्क का विस्तार करने की योजना है।

वर्तमान में लक्षद्वीप पहुंचने के लिए यात्रियों को लंबी समुद्री यात्रा या अगत्ती तक हवाई यात्रा के बाद नाव का सहारा लेना पड़ता है। कई मामलों में यह यात्रा 10 से 20 घंटे तक का समय ले सकती है। नई सीप्लेन सेवा के शुरू होने के बाद कोच्चि से लक्षद्वीप तक की यात्रा लगभग एक से डेढ़ घंटे में पूरी की जा सकेगी। इसके अलावा द्वीपों के बीच यात्रा भी पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएगी।



सरकार इस परियोजना को केवल परिवहन सेवा के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में देख रही है। बेहतर कनेक्टिविटी से लक्षद्वीप में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। प्राकृतिक सुंदरता और समुद्री जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध यह द्वीपसमूह पहले से ही एक प्रमुख इको-टूरिज्म गंतव्य माना जाता है। आसान पहुंच उपलब्ध होने से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है।

इसके साथ ही सीप्लेन सेवा आपातकालीन चिकित्सा निकासी और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को भी अधिक प्रभावी बनाएगी। दूरस्थ द्वीपों में स्वास्थ्य सेवाओं और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में यह सेवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उड़ान योजना के व्यापक उद्देश्य के अनुरूप यह परियोजना सस्ती और सुलभ हवाई यात्रा को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए मई 2026 से परीक्षण उड़ानों का संचालन शुरू किया गया था। लक्षद्वीप के लैगून में सफल जल अवतरण के साथ लगभग 12 परीक्षण उड़ानें विभिन्न चरणों में संचालित की गईं। इन परीक्षणों के दौरान जल सतह पर लैंडिंग की व्यवहार्यता, द्वीपों पर विकसित किए गए डॉकिंग बुनियादी ढांचे की तैयारी, मौसम की परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों का व्यापक मूल्यांकन किया गया। सभी परीक्षणों के सफल रहने के बाद परियोजना को अंतिम संचालन की दिशा में आगे बढ़ाया गया।

सीप्लेन संचालन के लिए अगत्ती, कवारत्ती और किल्तान सहित कई स्थानों पर वाटर एयरोड्रोम विकसित किए जा रहे हैं। इन सुविधाओं में फ्लोटिंग जेट्टी, यात्री बोर्डिंग पॉइंट, आधुनिक सुरक्षा प्रणाली और नेविगेशन उपकरण शामिल हैं। यह बुनियादी ढांचा भविष्य में व्यापक सीप्लेन नेटवर्क की नींव तैयार करेगा। किराए के संबंध में प्रारंभिक अनुमान के अनुसार एकतरफा टिकट की कीमत लगभग 12,000 रुपये हो सकती है। हालांकि उड़ान योजना के तहत सीमित सीटों पर 2,000 से 4,000 रुपये के बीच सब्सिडी वाले किराए की भी संभावना जताई जा रही है, जिससे अधिक लोगों को इस सेवा का लाभ मिल सकेगा।

लक्षद्वीप को इस परियोजना के पहले गंतव्य के रूप में चुनने के पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। यहां पहुंच के सीमित साधन, पर्यटन की बढ़ती मांग, प्राकृतिक लैगून की उपलब्धता और द्वीपीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर सरकार का विशेष ध्यान इस निर्णय के प्रमुख आधार रहे हैं। कोच्चि और अगत्ती के बीच शुरू होने वाली यह सेवा केवल एक नई विमानन परियोजना नहीं है, बल्कि भारत में जल-आधारित विमानन के एक नए युग की शुरुआत का संकेत भी है।

यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, केरल के बैकवाटर्स और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों तक भी सीप्लेन नेटवर्क का विस्तार किया जा सकता है। ऐसे में 22 जून 2026 को प्रस्तावित यह शुरुआत भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, पर्यटन विकास और विमानन नवाचार के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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